मोपेड से 30 टन सीमेंट! छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा , नुवोको विस्टास पर अरबों खरबों के फर्जी बिलिंग घोटाले के आरोप

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Deepak Mittal

फर्जी वाहनों से सीमेंट की ढुलाई दिखाकर करोड़ों का जीएसटी घोटाला  शिकायत हाईकोर्ट तक पहुंची, शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

रायपुर/बलौदा बाजार,,, छत्तीसगढ़ की सीमेंट इंडस्ट्री में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरा प्रशासनिक तंत्र हिला दिया है।
नुवोको विस्टास कॉरपोरेशन लिमिटेड, जो राज्य की जानी-मानी सीमेंट कंपनी है, उस पर फर्जी बिलिंग, टैक्स चोरी और डीलरों के साथ करोड़ों की ठगी का आरोप लगा है।
जांच में सामने आया है कि कंपनी ने अपनी बिक्री को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए ऐसे बोगस बिल (फर्जी बिल) बनाए, जिनमें माल ढुलाई के लिए जिन वाहनों के नंबर दर्ज हैं — वे असल में मोपेड, ऑटो, कार और स्कूल बसें हैं!

“मोपेड” से 25 टन, “स्विफ्ट कार” से 22 टन सीमेंट की ढुलाई दिखी!

प्राप्त ई-वे बिल और जीएसटी दस्तावेजों के अनुसार कंपनी ने:

टीवीएस मोपेड से 20 मीट्रिक टन सीमेंट (30 जनवरी 2022)

दो मोपेड से 30-30 मीट्रिक टन सीमेंट (13 व 23 अक्टूबर 2021)

मारुति स्विफ्ट कार से 22 मीट्रिक टन सीमेंट (23 फरवरी 2021)

बजाज थ्री-व्हीलर (क्षमता मात्र 545 किलो) से 25 मीट्रिक टन सीमेंट

टाटा एस मिनी ट्रक (क्षमता 735 किलो) से 25 मीट्रिक टन सीमेंट

ढुलाई के ये सारे बिल ई-वे बिल पोर्टल में अपलोड किए गए हैं। यानी फर्जीवाड़ा सिर्फ कागज़ पर नहीं, बल्कि सरकारी पोर्टल पर दर्ज है।

सिर्फ कागज़ों में भेजा गया हजारों मीट्रिक टन सीमेंट

दस्तावेज़ों के अनुसार,पिछले 5-6 वर्षों में कंपनी ने हजारों मीट्रिक टन सीमेंट (करोड़ो रुपए मूल्य) केवल बिलों में दिखाकर बेच दिया।
वास्तविक रूप में यह सीमेंट कहीं गया ही नहीं।

बालोद के डीलर मोनिका जैन/अमित जैन (जय ट्रेडर्स) ने बताया —
कंपनी ने हमारे नाम पर जीएसटी बिल के लिए पैसे लिए, बिल काटा, ट्रांसपोर्ट दिखा दिया लेकिन सीमेंट की बोरी नहीं भेजी।
25 टन का बिल काटा और ट्रक की जगह मोपेड नंबर डाल दिया गया। ये फर्जीवाड़ा सुनकर कोई भी दंग रह जाए।”

शिकायत हाईकोर्ट, सेबी और वित्त मंत्रालय तक पहुंची
शिकायतकर्ता ने इस मामले में कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों —
गगन रहंगडाले (डिस्ट्रिक्ट मैनेजर), अमित वैद्य (एरिया मैनेजर), देवाशीष देव (सीनियर मैनेजर छत्तीसगढ़) और सीएफए शशिभूषण शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यह शिकायत हाईकोर्ट, सीएम सचिवालय, सेबी, जीएसटी काउंसिल और वित्त मंत्रालय तक भेजी जा चुकी है।
मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
दो GST नंबर, एक ही फर्जीवाड़ा

कंपनी के दो जीएसटी नंबर सामने आए हैं —
नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड – 22AAACL4159L1ZI

नूविस्टा लिमिटेड -22AABCE7927L1ZI

दोनों में ही 2-व्हीलर, 3-व्हीलर और 4-व्हीलर वाहनों से सीमेंट की सप्लाई दिखाकर करोड़ों के फर्जी बिल बनाए गए।
शिकायतकर्ता ने बताया 4 सितंबर 2024 को मेरे द्वारा नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड – 22AAACL4159L1ZI के खिलाफ जीएसटी में लिखित शिकायत की गई थी और अभी नूविस्टा लिमिटेड -22AABCE7927L1ZI की शिकायत 11 अगस्त 2025 को सी पी ग्राम के माध्यम से की गई,लेकिन जीएसटी विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।”

जीएसटी विभाग की चुप्पी पर गंभीर सवाल
फर्जी गाड़ियों और झूठे बिलों के इतने ठोस सबूतों के बावजूद विभाग ने केवल शो-कॉज नोटिस (112.48 करोड़) जारी किया है, जिससे शिकायतकर्ता ने विभाग की भूमिका पर ही सवाल उठा दिए हैं।
हजारों फर्जी गाड़ियां पोर्टल पर दिख रही हैं, और विभाग सिर्फ नोटिस देकर जवाब मांग रहा है?
क्या जीएसटी अधिकारी किसी बड़ी घटना या कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं?”

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि विभाग के अधिकारी मामले को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं, जिससे सरकार को करोड़ों का टैक्स नुकसान हो रहा है।

विशेषज्ञ बोले – मार्केट वैल्यू बढ़ाने के लिए फर्जी बिलिंग

वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बोगस बिलिंग से कंपनियां अपनी बिक्री कृत्रिम रूप से बढ़ा दिखाती हैं, ताकि उनकी मार्केट वैल्यू, निवेश और शेयर कीमतें बढ़ें।
असल में यह कॉर्पोरेट टैक्स फ्रॉड का क्लासिक उदाहरण है।

कंपनी का पक्ष
जब इस मामले पर नुवोको विस्टास कॉरपोरेशन लिमिटेड के छत्तीसगढ़ हेड से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

केंद्र एवं राज्य जीएसटी विभाग का पक्ष लेने के लिए जब नवभारत टाइम्स 24 x7.in की टीम नई दिल्ली मुख्यालय पहुंचे तो उच्च अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया इसी तरह रायपुर के जीएसटी विभाग के प्रमुख से लगातार चर्चा करने का प्रयास किया गया परंतु उन्होंने भी कोई संतुष्ट पूर्वक जवाब नहीं दिया

अब कार्रवाई की मांग तेज
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इनकम टैक्स, सेबी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी इस मामले की जानकारी दी जाए।

जीएसटी अधिनियम की धारा 132 के तहत 200% जुर्माना और 5 साल की सजा का प्रावधान है।

अब जनता पूछ रही है — क्या ‘सीमेंट’ के नाम पर छत्तीसगढ़ में फर्जीवाड़े की दीवार खड़ी की जा रही है?

यह मामला अब केवल एक कंपनी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय ईमानदारी और शासन की साख का बन चुका है।
अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि —
क्या छत्तीसगढ़ सरकार इस “सीमेंट घोटाले” की असली नींव हिलाने का साहस दिखाएगी?

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Author: Deepak Mittal

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