यह ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली की सामान्य परिचालन है। इस प्रणाली में प्रत्येक किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं, जिसमें हर सिग्नल के बाद दूसरी ट्रेन चल सकती है । मालगाड़ी और यात्री गाड़ियों के लिए अलग – अलग ट्रैक नहीं होती है, दोनों एक ही ट्रैक पर चलती है और एक दूसरे के पीछे चलाई जाती है । रेलवे की ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली एक सुरक्षित कार्यप्रणाली है, और इस रेलखंड में 2023 से लागू है । अतः ऐसे भ्रामक समाचारों पर ध्यान न दें और अफवाहों से बचें और इस प्रकार की भ्रामक खबरों को चलाने और फॉरवर्ड करने से भी बचें ।
Author: Deepak Mittal










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