कांकेर में पट्टा घोटाले का पर्दाफाश! फर्जी कागज़ों से जंगल की ज़मीन हड़पी, राज खोले तो दहल गई पूरी तहसील!

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कांकेर में पट्टा घोटाले का पर्दाफाश! फर्जी कागज़ों से जंगल की ज़मीन हड़पी, राज खोले तो दहल गई पूरी तहसील!

वन अधिकार पट्टे में बड़ा फर्जीवाड़ा — ग्राम मयाना के तीन आरोपी गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों से 5 लाख से अधिक की सरकारी जमीन पर कब्ज़ा, जांच में प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर।

वन भूमि पर फर्जीवाड़ा: कांकेर में उजागर हुआ चौंकाने वाला पट्टा घोटाला

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। जिले के चारामा क्षेत्र में कुछ लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों के ज़रिए सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम मयाना के ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई कि गांव के कुछ लोगों ने फर्जी वन अधिकार पट्टे हासिल कर सरकारी तंत्र को धोखा दिया है।

ग्रामीणों की शिकायत पर जब एसडीएम चारामा ने जांच शुरू की, तो सच सामने आते ही प्रशासन के होश उड़ गए — आरोपियों ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर शासकीय भूमि अपने नाम करवा ली थी, जिससे सरकार को ₹5,17,773 का आर्थिक नुकसान हुआ।


जांच में खुला फर्जीवाड़े का जाल

एसडीएम कार्यालय की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि जीवन ठाकुरशोप सिंह और नीरज कुमार पोया नामक तीन व्यक्तियों ने वन विभाग और राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर वन अधिकार मान्यता पत्र (Forest Rights Patta) हासिल किए थे।
उन्होंने न केवल सरकारी जमीन पर गलत दावा किया, बल्कि राजस्व विभाग को गुमराह कर खुद को “लाभार्थी” साबित किया।

जांच रिपोर्ट थाना चारामा को सौंपे जाने के बाद पुलिस ने अपराध क्रमांक 123/25 दर्ज कर विवेचना शुरू की। रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला कि इस घोटाले में कुछ भीतरखाने के हाथ भी सक्रिय थे।


तीन आरोपी गिरफ्तार, घोटाले की जड़ तक पहुंचेगी जांच

चारामा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों —

  • जीवन ठाकुर (49)

  • शोप सिंह (60)

  • नीरज कुमार पोया (23)
    को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

थाना प्रभारी तेज वर्मा और उनकी टीम ने बताया कि इस घोटाले में और भी लोगों की संलिप्तता हो सकती है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या राजस्व या वन विभाग के कर्मचारियों ने भी इस फर्जीवाड़े में सहयोग किया था।


प्रशासन सख्त: अब पट्टा प्रक्रिया होगी डिजिटल

घोटाले के बाद प्रशासन ने वन अधिकार पट्टा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटाइज्ड करने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों ने कहा कि अब राजस्व और वन विभाग के डेटा का नियमित मिलान किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति जाली कागज़ों के ज़रिए सरकारी लाभ न ले सके


ग्रामीणों की जागरूकता से खुला राज

ग्राम मयाना के ग्रामीणों ने बताया कि कुछ संदिग्ध लोगों के नाम पर अचानक सरकारी ज़मीन के पट्टे मिलने पर उन्हें शक हुआ।
जब उन्होंने दस्तावेज़ों की जांच करवाई तो सारा मामला फर्जी हस्ताक्षर और मनगढ़ंत रिकॉर्ड का निकला। ग्रामीणों की इस सतर्कता ने न केवल एक बड़ा घोटाला उजागर किया, बल्कि प्रशासन को भी झकझोर कर रख दिया।


पुलिस का संदेश: फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं

पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है —

“किसी भी व्यक्ति को शासन की भूमि पर धोखाधड़ी से कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। फर्जी दस्तावेज़ बनाने वालों को कड़ी सज़ा मिलेगी।”

अब कांकेर पुलिस इस घोटाले की हर परत उधेड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने और “पट्टा माफिया” अभी तक सरकारी ज़मीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

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Author: Deepak Mittal

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