निजी शिक्षण संस्थान ट्रेडिंग हाउस और शिक्षक सेल्समैन हो गए शिक्षक को गुरु का नाम देकर गुरु शब्द का अवमूल्यन ना करें – पारस सकलेचा
रतलाम से इमरान खान की रिपोर्ट
रतलाम शिक्षक में सेवा और व्यापार का संतुलन बिगड़ गया है। मिशन के रूप में कार्य करने वाले और व्यापार की तरह कार्य करने वाले शिक्षक का अनुपात 20 और 80 हो गया है। शिक्षक को गुरु का दर्जा देकर इस महान अलौकिक शब्द का अवमूल्यन ना करें। यह बात युवाम के संस्थापक पारस सकलेचा ने कहीं। आप युवाम सभागृह में शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे।
सकलेचा ने कहां की अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान ट्रेडिंग हाउस हो गए और उसमें पढ़ाने वाले शिक्षक सेल्समेन हो गए। शिक्षा के प्रोडक्ट में अब क्वालिटी का नहीं क्वांटिटी का महत्व बढ़ गया है। कोचिंग क्लासो ने विद्यालय और शिक्षक की गुणवत्ता में गिरावट में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। और इसके लिए हम सब दोषी है।
प्रसिद्ध पर्यावरणविद खुशालसिंह पुरोहित ने कहा कि शिक्षक को नए समाज के निर्माण की चुनौती को स्वीकार करना चाहिए। पारस दादा ने 50 साल में सिद्ध कर दिया कि पूरा राष्ट्र उनके लिए विद्यालय है और समाज विद्यार्थी है।
शिवम राठौर सर ने कहा कि 48 साल से लगातार 365 दिन तक कक्षा चलाकर युवाम ने शिक्षक की गरिमा को चार चांद लगाए हैं । इस अवसर पर सुमित सर और पार्थ सर ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का एवं शिक्षकों का सम्मान विद्यार्थियों द्वारा शाल श्रीफल से किया गया । कार्यक्रम का संचालन सुमित सर और आभार प्रदर्शन हेमंत ने किया।
Author: Deepak Mittal









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