नशे और अपराध की गिरफ्त में छत्तीसगढ़- ताराचंद साहू, बालोद

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 बालोद– धान का कटोरा और शांत-सौम्य संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ आज नशे और अपराध की गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है। बीते दिनों धमतरी में रायपुर के तीन युवकों की हत्या ने प्रदेश में फैलते नशे के कारोबार और अपराध की सच्चाई को उजागर कर दिया है। सात राज्यों की सीमाओं से जुड़े होने के कारण यहां नशे की बड़ी खेप आसानी से पहुंच रही है। उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब और महाराष्ट्र से होकर तस्कर छत्तीसगढ़ तक नशे की सामग्री पहुंचा रहे हैं।

राज्य में गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन, चरस, कोकिन से लेकर अल्फाजोन और नशीली सिरप तक की खुलेआम बिक्री हो रही है। नाइट पार्टियों और प्राइवेट आयोजनों के जरिए युवाओं को नशे के जाल में फंसाया जा रहा है। नारकोटिक्स सेल ने कई राज्यों से तस्करों को पकड़ा है, जिनमें स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालक और बड़े रसूखदार लोगों की संलिप्तता सामने आई है।

पिछले कुछ वर्षों में नशे की लत ने अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ाया है। आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 50 हजार आपराधिक घटनाओं में से 70 प्रतिशत घटनाएं नशे से जुड़ी हुई हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के मुताबिक फिलहाल छत्तीसगढ़ की अदालतों में 4 लाख 19 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें ज्यादातर आपराधिक प्रकरण हैं।

युवाओं के साथ-साथ महिलाओं और छात्राओं में भी धूम्रपान व नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। हॉस्टलों और कॉलेजों में यह एक तरह का “बराबरी का फैशन” बनता जा रहा है, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

नशे और अपराध के इस संकट के बीच शराब का मुद्दा भी बेहद गंभीर है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में 67 नई शराब दुकानों की अनुमति देने से प्रदेश में लाइसेंसी दुकानों की संख्या 741 तक पहुंच गई है। शराब से राजस्व जुटाने का लक्ष्य 2025-26 में 13 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। इससे छत्तीसगढ़ देश का सर्वाधिक शराब उपभोग करने वाला राज्य बन गया है, जो प्रदेश की छवि पर कलंक है।

शिक्षा की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। केंद्र सरकार की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ 34वें स्थान पर है और चौथी श्रेणी में शामिल है। आत्मानंद स्कूलों की बदौलत प्रदेश को कुछ राहत मिली है, वरना स्थिति और भी चिंताजनक होती।

जनता की उम्मीद है कि मौजूदा सरकार अपराध और नशे के खिलाफ कठोर कदम उठाकर छत्तीसगढ़ की बिगड़ती छवि को सुधारने की दिशा में काम करेगी। हर गली-मोहल्ले में सक्रिय तस्करों और कोचियों पर लगाम कसना और शिक्षा-स्वास्थ्य पर ध्यान देना ही प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है।

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Author: Deepak Mittal

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