हाँ, तुम नारी हो: एक कविता जो स्त्री के हर रूप को सम्मान देती है

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Deepak Mittal

***हां तुम नारी हो***

तुम ख्वाब हो ख्याल हो
तुम जान हो जहान हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
कहीं रात की थाली हो
कहीं सुबह की अधरों से लगी हुई प्याली हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
कहीं तुम प्रेयसी हो
कहीं तुम प्रियतम हो
मेरे सुंदर मन की आत्मा हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
एक पुरुष के मन की अभिलाषा हो
आशा और निराशा हो
जीवन प्रत्याशा हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
जागृति हो साहस हो
जीने के लिए एक सहारा हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
समस्या हो समाधान हो
बुद्धि हो अभिमान हो
अंधेरी रात में उजली प्रकाश हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
पुरुष के मन की अतृप्त इच्छा हो
कामना हो वासना हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
योगिनी हो भोगनी हो
माया हो छाया हो
कोमल हो निर्मल हो
काली से फूल हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।
सिंधु हो सरिता हो
जीवन का उद्ग्गम हो
पावन हो शीतल हो
लगती बड़ी प्यारी हो
हां तुम नारी हो।

स्वरचित
डॉ सरिता चौहान
गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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Author: Deepak Mittal

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