धान घोटाले की आंच में घिरे खाद्य मंत्री! — सदन में घमासान, गड़बड़ी स्वीकारी, एफआईआर की पुष्टि

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रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन धान उठाव की गड़बड़ी पर जमकर हंगामा हुआ। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल विपक्ष और कांग्रेस विधायकों के तीखे सवालों के घेरे में आ गए। बालोद और बिलासपुर जिलों में धान के उठाव को लेकर अनियमितताओं की बात उठी, जिस पर मंत्री ने खुद स्वीकार किया कि कुछ समितियों में गड़बड़ी हुई है और जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।


सदन में गूंजा बालोद और बिलासपुर का मामला

कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सवाल उठाते हुए कहा कि

“बालोद जिले में धान का उठाव ठीक से नहीं हो रहा, विभागीय रिकॉर्ड और वेबसाइट के डेटा में भारी अंतर है। धान सही तरीके से संग्रहित नहीं है, जिससे धान सड़ रहा है।”

इस पर खाद्य मंत्री बघेल ने सफाई दी कि

“धान खरीदी का डेटा लगातार अपडेट होता है, और इसे अच्छी तरह से ढंककर रखा जा रहा है।”


पूर्व मुख्यमंत्री ने मांगा हिसाब, अटल श्रीवास्तव ने खोला और राज

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से पूछा कि

“नीलामी वाला धान और एफसीआई/नान को दिया गया धान — इन दोनों की मात्रा कितनी है?”

इस पर खाद्य मंत्री ने जवाब दिया:

“1.69 लाख मीट्रिक टन धान मिलर्स को दिया गया है, जबकि 2.72 हजार मीट्रिक टन उठाव पूरा हो चुका है।”

इसी बीच कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर जिले की दो सोसाइटियों — मल्हार और रिस्दा में धान शॉर्टेज का मुद्दा उठाया। मंत्री ने जवाब दिया कि

“140 केंद्रों में लेखा मिलान में जीरो शॉर्टेज आया है, लेकिन मल्हार और रिस्दा में अनियमितता पाई गई है। एफआईआर के आदेश दिए जा चुके हैं।”


???? क्या कहती है यह बहस?

इस पूरी बहस से साफ है कि धान खरीदी और भंडारण को लेकर जमीनी स्तर पर कई खामियां सामने आ रही हैं। हालांकि मंत्री ने इसे स्वीकारते हुए कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन विपक्ष इसे बड़ी गड़बड़ी का संकेत मान रहा है।

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Author: Deepak Mittal

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