आयकर विभाग ने हाल ही में नया लागत महंगाई सूचकांक (सीआईआई) जारी किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसे 376 तय किया गया है, जो एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। इसका मतलब है कि इस वित्त वर्ष में जो भी संपत्ति बेची जाएगी, उसकी सूचकांक लागत निकालने में सीआईआई का इस्तेमाल किया जाएगा।
नए सूचकांक की जरूरत उन लोगों को पड़ेगी, जो जमीन, मकान, बॉन्ड या सोने जैसे लॉन्ग टर्म निवेश को बेचकर लाभ कमाना चाहते हैं। संपत्ति बेचने पर उन्हें कितना मुनाफा होगा और कितना लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स देना होगा, इसकी गणना में लागत महंगाई सूचकांक की जरूरत पड़ती है।
इन संपत्तियों पर ही उठा सकेंगे फायदा
जुलाई, 2024 के बाद नियमों में बदलाव के तहत अब ज्यादातर संपत्तियों पर सीआईआई आधारित इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा। रिहायशी मकानों पर यह फायदा अब भी उपलब्ध है। बशर्ते… संपत्ति 22 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई हो और 23 जुलाई, 2024 या उसके बाद बेची जा रही हो। ऐसे में पुराने व नए टैक्स नियमों में एक का चुनाव कर सकते हैं।
- पुराने नियम के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी टैक्स देना होगा, पर इंडेक्सेशन का लाभ मिलेगा।
- नए नियम में 12.5 फीसदी एलटीसीजी टैक्स देना होगा, लेकिन इंडेक्सेशन लाभ नहीं मिलेगा।
क्या है सीआईआई
यह ऐसा आंकड़ा है, जो किसी संपत्ति की हर साल बढ़ने वाले वर्तमान मूल्य में महंगाई के असर को दिखाता है। आप जब कोई संपत्ति बहुत पहले खरीदते हैं और वर्षों बाद बाद बेचते हैं, तो उसका मूल्य महंगाई के कारण बढ़ता है। ऐसे में वास्तव में कितना लाभ हुआ, यह निकालने के लिए सीआईआई का इस्तेमाल होता है।
इस फॉर्मूले से कर सकते हैं गणना
इंडेक्सेशन बाद लागत = (बिक्री वाले वर्ष का सीआईआई/खरीद वाले साल का सीआईआई) × खरीद की मूल कीमत
मान लीजिए, आपने 2011-12 में 50 लाख में मकान खरीदा था, जब सीआईआई 184 था। उसे 2025-26 में बेच रहे हैं, जब सीआईआई 376 है। खरीद मूल्य को महंगाई से एडजस्ट करने की गणना होगी…(376/184)×50 लाख = 1,02,17,391 रुपये।
- अब आपने मकान को 1.50 करोड़ में बेचा, तो आपका लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होगा…1.50 करोड़-1.02 करोड़=करीब 48 लाख रुपये।
- अब 48 लाख पर 20 फीसदी की पुरानी दर से एलटीसीजी टैक्स देना होगा, जो 9.6 लाख होगा।
- इंडेक्सेशन लाभ नहीं लेने पर 50 लाख का घर 1.50 करोड़ में बेचने पर लाभ एक करोड़। इस पर 12.5 फीसदी दर से 12.50 लाख टैक्स लगेगा।
एसेट दो साल पुराना तभी मिलेगा लाभ
आयकर कानून की धारा-48 के तहत एसेट (जमीन, घर, बॉन्ड, सोना) बेचने पर इंडेक्सेशन लाभ तभी मिलता है, जब उसे बेचने से पहले दो साल या अधिक समय अपने पास रखा हो। अगर आपने कोई संपत्ति 2005 में 20 लाख में खरीदी थी और अब 2025 में बेचने की योजना बना रहे हैं, तो 2005-06 और 2025-26 के सीआईआई की मदद से उसकी इंडेक्स्ड लागत निकाल सकते हैं। इससे मुनाफे पर कम टैक्स भरना होगा। -स्वीटी मनोज जैन निवेश एवं कर सलाहकार
Author: Deepak Mittal










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