खुड़खुड़िया जुए पर ‘चुनिंदा’ कार्रवाई: कोतरारोड़-जूटमिल में दबिश, लेकिन घरघोड़ा क्यों बना सुरक्षित अड्डा?-कार्रवाई में भी पक्षपात?

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शैलेश शर्मा 9406308437नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला ब्यूरो रायगढ़

रायगढ़। जिले में जुए और सट्टेबाज़ी के खिलाफ पुलिस का अभियान जारी है। कोतरारोड़ और जूटमिल थाना पुलिस ने 2 जुलाई को दो अलग-अलग जगहों पर छापामार कार्रवाई करते हुए खुड़खुड़िया जुआ खेलते पांच आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा।

आरोपियों के पास से ₹12,130 नगद और जुआ सामग्रियां जब्त कर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है आख़िर घरघोड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस की चुप्पी क्यों?

कोतरारोड़: कांटाहरदी में दबिश, तीन गिरफ्तार : थाना प्रभारी निरीक्षक मोहन भारद्वाज को ग्राम कांटाहरदी में जुए की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। कई आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले, लेकिन तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम:

  • भुनेश्वर कुम्हार (26),
  • दिलहरण चौहान (51),
  • सुनील साहू (30)

इनके पास से ₹6,780 नगद, गोटी, पट्टी, टोकरी जैसे जुआ उपकरण जब्त हुए। आरोपियों पर छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 और 6(क) के तहत कार्रवाई की गई।

जूटमिल: डुमरपाली में छापामारी, दो जुआरी धरे गए : जूटमिल थाना प्रभारी प्रशांत राव की अगुवाई में ग्राम डुमरपाली में दबिश देकर दो आरोपियों को पकड़ा गया:

  • प्रेमदास (23),
  • चंद्रभानु साव (24)

मौके से ₹5,350 नगद, छह खुड़खुड़िया गोटियां और प्रतीकों वाला प्लास्टिक बैनर जब्त हुआ। यहां भी जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया।

लेकिन… घरघोड़ा क्यों है पुलिस कार्रवाई से बाहर?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई हो रही है, तब घरघोड़ा क्यों ‘जुआ संरक्षित क्षेत्र’ बना हुआ है? स्थानीय जानकार बताते हैं कि घरघोड़ा थाना क्षेत्र में खुड़खुड़िया जुआ का कारोबार न केवल खुलेआम चल रहा है, बल्कि सप्ताहांत पर विशेष ‘जुआ सत्र’ आयोजित होते हैं, जिनमें हजारों रुपये का अवैध लेन-देन होता है।

क्या यह मुमकिन है कि पुलिस को इन जुआ अड्डों की भनक तक न हो? या फिर मिलीभगत की कोई अदृश्य डोर है जो कार्रवाई को रोक रही है? जब एक ओर पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल पूरे जिले में अवैध जुआ और सट्टे पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, वहीं घरघोड़ा थाने की निष्क्रियता से पुलिस की साख पर सवालिया निशान लग रहा है।

“कहीं कार्रवाई की आड़ में दिखावा तो नहीं?”

  • एक पक्ष में ताबड़तोड़ छापे, गिरफ्तारी और जब्ती, तो दूसरे पक्ष में चुप्पी और खामोशी। क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है? क्या पुलिस की कार्रवाई अब ‘चुनिंदा इलाकों’ और ‘चुनिंदा आरोपियों’ तक ही सीमित रह गई है?
  • अगर वाकई पुलिस निष्पक्ष और कड़ाई से काम कर रही है, तो घरघोड़ा में अब तक एक भी बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सवाल जनता के हैं, जवाब पुलिस को देना होगा : घरघोड़ा की जनता जानना चाहती है कि क्या स्थानीय पुलिस पर राजनीतिक दबाव है? क्या जुआ संचालकों से मिलीभगत है? और क्या प्रशासनिक ढांचे में ही कोई ऐसा ‘अलादीन का चिराग’ है, जो कार्रवाई को दूर रखता है? यदि पुलिस अधीक्षक वाकई जिले में कानून का राज कायम करना चाहते हैं, तो सबसे पहले घरघोड़ा जैसे क्षेत्रों में निष्क्रियता का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए और तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब जनता को ‘न्यूज बुलेटिन’ नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
जुआ के अड्डों को संरक्षण नहीं, समापन चाहिए।

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Author: Deepak Mittal

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