इन्दौर, मध्यप्रदेश — रिश्तों की भीड़ में यदि कोई रिश्ता सबसे मजबूत, सबसे मौन और सबसे गहरा होता है, तो वह है पिता का। इसी भावना को कवयित्री शोभारानी तिवारी ने अपनी हृदयस्पर्शी कविता “पिता” में बेहद संजीदगी से शब्दों में पिरोया है।
कविता की शुरुआत में वे पिता को आकाश की उपमा देती हैं — ऐसा आकाश जो टिमटिमाते तारों की तरह विश्वास जगाता है और ईश्वर की सच्ची अरदास की तरह जीवन में विशेष स्थान रखता है। कविता में माँ और पिता की भूमिकाओं को अलग-अलग किन्तु पूरक बताया गया है — जहाँ माँ वर्तमान को संवारती है, वहीं पिता भविष्य की चिंता करते हैं।
शोभारानी जी की पंक्तियाँ जैसे –
“पिता पतझड़ में भी मधुमास है,
माता-पिता ही हमारे भगवान हैं”
पढ़ने वाले को गहराई से झकझोर देती हैं।
कविता में पिता को नाव की पतवार, हिमालय जैसी रक्षा करने वाली शक्ति और पूरे परिवार के पालनहार के रूप में चित्रित किया गया है। एक ओर यह रचना भावनात्मक गहराई लिए हुए है, वहीं दूसरी ओर यह पाठक को यह सोचने पर विवश करती है कि जीवन में माता-पिता का साया कितना आवश्यक है।
शोभारानी तिवारी, जो इंदौर के खातीवाला टैंक स्थित 619 अक्षत अपार्टमेंट में निवास करती हैं, अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को सशक्त करती रही हैं।
कविता का समापन एक भावनात्मक और आध्यात्मिक संदेश के साथ होता है:
“माता-पिता स्नेह का बंधन हैं,
उनके चरणों में ही चारों धाम हैं।”
यह कविता न केवल एक साहित्यिक रचना है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति को समर्पित श्रद्धांजलि है, जिसने अपने जीवन की नींव माता-पिता के त्याग और प्रेम पर रखी है।
Author: Deepak Mittal








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