
धान बेचने पहुंचे किसानों ने सड़क पर लगाया जाम, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
शैलेश शर्मा 9406308437नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला ब्यूरो रायगढ़
घरघोड़ा! आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, नवापारा टेंडा के प्रभारी प्रबंधक श्री राम राठिया ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद क्षेत्र में धान खरीदी का कार्य पूरी तरह ठप्प हो गया है। इस अप्रत्याशित स्थिति से सैकड़ों किसान परेशान और आक्रोशित हैं। धान खरीदी केंद्रों पर जब किसानों को खरीद प्रक्रिया बंद होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने अपना गुस्सा सड़क पर उतार दिया।
किसानों ने नवापारा टेंडा मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की। जाम के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया, और राहगीरों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि समय पर धान न बिकने से उनकी आर्थिक स्थिति और दैनिक जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है।
“धान खरीदी की व्यवस्था तुरंत सुधारें”
किसानों ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि धान खरीदी का यह संकट अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि अगर धान खरीदी प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई तो उनकी फसल खराब हो जाएगी, जिससे उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। प्रदर्शनकारी किसानों ने मांग की कि प्रशासन जल्द से जल्द नए प्रबंधक की नियुक्ति करे और धान खरीदी की व्यवस्था बहाल की जाए।

प्रबंधक ने दिया इस्तीफा, धान खरीदी पर ब्रेक
सूत्रों के अनुसार, प्रभारी प्रबंधक पुरनु राम राठिया ने 7 दिसंबर 2024 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि उन्हें धान खरीदी का कार्य संचालित करने के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण वह यह जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ हैं। उनके इस्तीफे के बाद से धान खरीदी का सारा काम रुक गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर किसानों में आक्रोश
धान खरीदी ठप्प होने के कारण परेशान किसानों ने प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। एक प्रदर्शनकारी किसान ने कहा, “हम धान बेचने के लिए हर दिन खरीदी केंद्र आ रहे हैं, लेकिन व्यवस्था ध्वस्त है। हमारी मेहनत की फसल सड़ने के कगार पर है। प्रशासन को तुरंत समाधान निकालना चाहिए।”
स्थिति कब सुधरेगी?
प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल इस मामले पर कोई ठोस जवाब देने से बच रहे हैं। जिले के सहकारिता विभाग ने जल्द ही स्थिति सामान्य करने का आश्वासन दिया है, लेकिन यह आश्वासन किसानों को संतुष्ट करने में नाकाम रहा है।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे और कब तक करता है। धान खरीदी पर लगे इस ब्रेक ने न केवल किसानों की आजीविका पर सवाल खड़ा कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को भी उजागर कर दिया है।
Author: Deepak Mittal










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