व्यवहारिक दिक्कतों के चलते धान ‌बेचने में परेशानियों से सांसत् में किसान , ज्ञापन

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

 

आरंग । तकनीकी मकड़जाल की वजह से धान बेचने में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों के चलते परेशान किसान सांसत् में हैं । धान खरीदने की वर्तमान गति के चलते वे आश्वस्त नहीं हो पा रहे कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर वे धान बेच भी पायेंगे या नहीं। किसानों में व्याप्त इस अनिश्चितता की भावना को दूर करने व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करने के साथ – साथ आवश्यकता पड़ने पर समयावधि बढ़ाने का आश्वासन किसानों को दे उन्होंने आश्वस्त करने की मांग को ले किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को मेल से ज्ञापन भेजा है । साथ ही ज्ञापन की प्रति विधानसभा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह तथा मुख्य सचिव अमिताभ जैन को भी भेज व्यापक किसान व‌ समितियों के हित में आवश्यक व्यवस्था कराने का आग्रह किया है ।‌

उन्होंने जानकारी दी है कि शासन द्वारा समितियों के माध्यम से धान खरीदी हेतु 14 नवंबर से 31 जनवरी तक अर्थात 78 दिन का समय निर्धारित किया गया है लेकिन इसमें शासकीय अवकाश के दिनों को हटाने ‌मे वास्तविक खरीदी महज 47 दिनों ही होगी जिसमें से 14 नवंबर से ले 8 दिसंबर तक के 24 दिनों में से अवकाश के दिनों ‌को छोड़ महज 16 दिनों ही धान खरीदा गया है इसमें प्रतिकूल मौसम की वजह से धान खरीदी बंद होने वाले दिन भी शामिल है । रायपुर जिले के अनेक उपार्जन केन्द्रों का दौरा कर किसानों व‌ कर्मियों सहित जागरूक किसानों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने बतलाया है कि जिले के 139 धान उपार्जन केन्द्रों में लगभग 15 लाख किसान पंजीकृत हैं जिनमें से करीब 14 लाख लघु व सीमांत किसान एवं 1 लाख दीर्घ किसान हैं । धान बेचने हेतु इन पंजीकृत किसानों का रकबा लगभग 2 लाख हेक्टेयर होने व रकबे के मान से लगभग 8 लाख टन धान खरीदी किया जाना है ।

आज दिनांक तक 2 लाख टन धान की खरीदी होने व इसमें से महज लगभग 15 हजार टन का ही उठाव होने व‌ करीबन पौने दो लाख टन धान खरीदी केन्द्रों में जाम होने की जानकारी दी है । प्रेषित ज्ञापन में आन लाइन टोकन सिस्टम से समस्या खड़ी होने की जानकारी देते हुये बतलाया गया है कि खरीदी के शुरुआती सप्ताह में उपार्जन केन्द्रों के लिये प्रतिदिन खरीदी के निर्धारित लक्ष्य का 70 प्रतिशत लघु व सीमांत किसानों व 30 प्रतिशत दीर्घ किसानों के लिये आरक्षित किया गया था जिसका लाभ ग्रामों में निवासरत किसान एंडरायड फोन व इलाके में नेटवर्क की समस्या होने से नहीं उठा पाये व शहरों से संपर्क रखने वाले किसान खलिहानों में धान तैयार न होने के बाद भी टोकन लेने में कामयाब रहे और इसकी पुष्टि विभागीय आंकड़ों से की जा सकती है जिससे स्पष्ट हो जावेगा कि शुरुआती सप्ताह में लक्ष्य का महज 35 प्रतिशत धान ही खरीदी केन्द्रों तक पहुंचा ।

कुछ दिन बाद इसमें संशोधन कर 60 प्रतिशत टोकन एप के माध्यम से व 40 प्रतिशत टोकन उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से जारी करने का फरमान जारी हुआ पर आरक्षण की सीमा यथावत रखने से यह भी प्रभावकारी साबित नहीं हुआ । खासकर बड़े किसानों के मन में तो यह भय बैठ गया है कि वे निर्धारित समय-सीमा में अपना धान इस हालत में नहीं बेच पायेंगे । पूर्ववर्ती वर्षों की तरह किसानों के बीच बिना भेदभाव किये टोकन जारी करने की संपूर्ण जिम्मेदारी उपार्जन केन्द्रों पर डालने या फिर एप के माध्यम से 30 प्रतिशत व उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 70 प्रतिशत टोकन जारी करने का संशोधन कर टोकन समस्या को दूर करने का सुझाव दिया गया है । धान बेचते समय सशरीर खरीदी केन्द्रों में उपस्थित होने में असमर्थ व नामिनी न रखे किसानों के लिये पूर्ववर्ती वर्षों की भांति आधार आधारित ओ पी पी का आप्शन भी शुरू कराने का आग्रह किया गया है ।

धान का प्रभावी परिवहन न होने से जाम धान की वजह से निकट भविष्य में धान खरीदी ठप्प होने की संभावना व्यक्त करते हुये प्रभावी परिवहन करवा समितियों को सूखती से होने वाले हानि से भी बचाने का अनुरोध किया गया है । ज्ञापन में पूर्ववर्ती वर्षों में परिवहन ठेकेदारों को धान के उठाव के लिये दिये जाने वाले अधिकतम 72 घंटे की अवधि को भी इस वर्ष समाप्त कर दिये जाने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये परिवहन कर्ताओं द्वारा और मनमानी की आशंका व्यक्त की गयी है । साथ ही परिवहनकर्ताओ द्वारा निर्धारित रूट पर वाहन लाने – ले जाने के बदले शार्टकट रुट से आ – जा शासन को चूना लगाने व सड़कों को खराब करने की गतिविधियों पर भी लगाम कसने का आग्रह किया गया है ।

बारदानों की भी समस्या निकट भविष्य में आने की जानकारी देते हुये अधिकांश मिलरो द्वारा उपार्जन केन्द्रों में भेजे जाने वाले बोरों में से तकरीबन 50 प्रतिशत जर्जर होने व इसे वापस ले जाने के बदले अपने राजनैतिक व प्रशासकीय प्रभामंडल का उपयोग कर केन्द्र प्रभारियों पर इसके उपयोग हेतु दबाव बनाने की प्रवृत्ति पर भी कड़ाई से रोक लगाने व समितियों को धान खरीदी में आने वाली समस्याओं से प्राधिकृत अधिकारियों के माध्यम से रुबरु हो निजात दिलाने व समितियों को हानि से बचाने पुख्ता व्यवस्था का आग्रह ज्ञापन में किया गया है । ज्ञापन में कमोबेश प्रदेश के सभी उपार्जन केन्द्रों में यही हालात होने की जानकारी देते हुये व्यापक किसान व‌ समिति हित में त्वरित प्रभावी व्यवस्था का आग्रह किया गया है ।

संकलनकर्ता रोशन चंद्राकर

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *