जे के मिश्र,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेलों में कैदियों के बीच लगातार हो रही मारपीट और बढ़ते विवादों को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए डीजी जेल को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब देने को कहा है।
चीफ जस्टिस ने किया सवाल, ‘स्पेशल जेल’ का मतलब क्या?
सुनवाई के दौरान जेल डीजी की ओर से बताया गया कि रायपुर और बिलासपुर में स्पेशल जेलों का निर्माण किया जा रहा है। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल उठाया कि स्पेशल जेल का मतलब क्या होता है? कोर्ट ने प्रदेश की जेलों में कानून व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और निर्देश दिए कि कैदियों के बीच हो रहे संघर्षों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
जेलों की क्षमता और निर्माण में देरी पर चर्चा
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान 2018 से 2024 के बीच प्रदेश की जेलों की स्थिति और नए जेल निर्माण की प्रगति पर पुलिस महानिदेशक (जेल) द्वारा एक तुलनात्मक रिपोर्ट पेश की गई। याचिकाकर्ता के वकील ने जेलों की क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या और निर्माण में हो रही देरी को लेकर आपत्ति जताई। कोर्ट ने जेल निर्माण कार्य की समय सीमा तय करने के निर्देश दिए।
नए बैरक और ओपन जेल का निर्माण
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि वर्तमान में 33 नए बैरक प्रदेश की 8 जेलों में निर्माणाधीन हैं, जिनकी क्षमता 1650 कैदियों की होगी। इसके साथ ही बेमेतरा में 2000 कैदियों की क्षमता वाली ओपन जेल बनाई जा रही है। डीजी जेल ने 2018 से अब तक हुए सुधारों का ब्यौरा भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया।
अगली सुनवाई 16 जनवरी 2025 को
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 16 जनवरी 2025 को तय की है। कोर्ट ने नई जेलों और बैरकों के निर्माण की प्रगति रिपोर्ट के साथ जेलों में लॉ एंड ऑर्डर को सुधारने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला प्रदेश की जेलों की व्यवस्था और सुधार को लेकर महत्वपूर्ण दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब सभी की नजर इस पर है कि कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

Author: Deepak Mittal
