महासमुंद। आज शहर के वार्ड नम्बर 26 के आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुधा रात्रे ने बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान के तथा वार्ड वासियों को शपथ दिलाई है कि बाल विवाह के रोकथाम के लिए हम सब केंद्र और राज्य सरकार की मंशा अनुरूप काम करेंगे और बाल विवाह अधिनियम का पालन करेंगे।आज 27 नवंबर को बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 22 जनवरी, 2015 को आरंभ की गई प्रमुख योजना ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जो बालिकाओं के प्रति समाज के व्यवहार और दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक रही है उसी की सफलता से प्रेरित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान आरंभ किया गया है। यह देश को बाल विवाह मुक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा जो विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में लड़कियों और महिलाओं के बीच शिक्षा, कौशल, उद्यम और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में बाल मृत्यु दर, जन्म लिंग अनुपात कम करने और सभी स्तरों पर लड़कियों के नामांकन को बढ़ावा देने में सफलता मिली है। हालांकि, बाल विवाह की कुरीति अभी भी व्याप्त है जो मानवाधिकार उल्लंघन का सबसे खराब स्वरूप है। ठोस प्रयासों के बावजूद, आज भी लगभग 5 में से 1 लड़की का विवाह विधि सम्मत आयु 18 वर्ष से पहले ही कर दी जाती है। यह एक ऐसी प्रथा है जो असंगत है और लड़कियों को प्रभावित करती है। उन्हें समय से पहले पारिवारिक देखभाल में झोंक दिया जाता है और वे युवावस्था की खुशियों से वंचित रह जाती हैं और अक्सर निर्धनता की चपेट में पहुंच जाती हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत प्रधानमंत्री के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ की भविष्य दृष्टि से प्रेरित है। इसे तब तक हासिल करना संभव नहीं है जब तक महिलाओं और लड़कियों को जीवन के सभी क्षेत्रों में पूर्ण, समान और सार्थक भागीदारी न दी जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि उनकी जीवन यात्रा आरंभ होते ही सरकार और सामाजिक दृष्टिकोण उनके मुद्दों पर केंद्रित हो। बाल विवाह मुक्त अभियान बाल विवाह समाप्त करने और देश भर में युवा लड़कियों के सशक्तिकरण के सरकार के प्रयासों का प्रमाण है। यह प्रगतिशील और समतापूर्ण समाज सुनिश्चित कर हर बच्चे की क्षमता को पूर्णता से साकार करेगा।

Author: Deepak Mittal










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