राष्ट्र का समग्र अग्रवाल समाज 31 अक्टूबर को मनाएगा दीपावली का त्यौहार…

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*समस्त अग्रवाल भाइयों व हिन्दू धर्म अनुयायियों से की अपील*

निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली

पूरे राष्ट्र का समग्र अग्रवाल समाज 31 अक्टूबर 2024 को  दीपावली का पर्व पूरे धूमधाम से मनाएगा, राष्ट्रीय अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय चेयरमेन प्रदीप मित्तल एवं वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ अशोक अग्रवाल ने बताया की त्यौहार की दो-दो तिथियां होने की वजह से भ्रम की स्थिति फैली हुई थी, इसे दूर करने के लिए अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन ने सभी हिंदुओं के आस्था के प्रतीक प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या को आधार मानते हुए, समग्र अग्रवाल समाज से दीपावली का त्योहार 31 अक्टूबर 2024 को ही मनाने की अपील जारी की है।

सर्वश्री गीता मनीषी, ज्ञानाचार्य महाराज,  ज्ञानानंद जी से सलाह  करने के उपरांत ही, पदाधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे हैं, उन्होंने बताया कि, अयोध्या प्रभु श्री राम की जन्म स्थली है और समस्त हिंदुओं की आस्था का प्रतीक भी है।


पदाधिकारीयों ने कहा कि, जब समस्त हिंदुओं के आस्था के प्रतीक प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में 31 अक्टूबर 2024 को दीपावली मनाई जा रही है तो, फिर पूरे पूरे भारतवर्ष में अलग-अलग तिथियां पर दीपावली ना मना कर, हम सब हिंदू समाज को 31 अक्टूबर 2024 को ही पूरे धूमधाम से दीपोत्सव का यह त्योहार मनाना चाहिए।

माना जाता है कि, दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।अयोध्यावासियों का हृदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए।

कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है और असत्य का नाश होता है। दीपावली यही चरितार्थ करती है-

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय

संस्था के महासचिव गिरीश मित्तल नई दिल्ली और राजेश भरूका सूरत ने बताया कि,  दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी स्वच्छ कर सजाते हैं। बाजारों में गलियों को भी स्वर्णिम झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाजार सब स्वच्छ और सजे दिखते हैं।


उन्होंने पूरे राष्ट्र के समग्र अग्रवाल समाज और हिंदुओं से अपील की है कि सभी मिलजुल कर पूरे प्रेम और संभव से यह त्यौहार एक ही तिथि पर मनावें , किसी प्रकार के भ्रम में ना पड़े।

काशी के विद्वानों ने भी खत्म किया भ्रम

दीपावली के त्योहार को लेकर चले आ रहे हैं मतभेद पर काशी के पंचांग और ज्योतिष के विद्वान एक मंच पर आकर भ्रम को खत्म करते हुए 31 अक्टूबर को दिवाली मनाए जाने की घोषणा की है। विश्व पंचांग के समन्वयक प्रोफेसर विनय कुमार पांडे ने बताया कि शास्त्रों में दीपावली निर्णय के लिए मुख्य काल प्रदोष में अमावस्या का होना जरूरी माना गया है

इस वर्ष प्रदोष (2 घंटे 24 मिनट ) और निशीथ( अर्ध रात्रि) में अमावस्या 31 अक्टूबर को पड़ रही है इसलिए 31 को ही दीपावली मनाना शास्त्र सम्मत है । देश के किसी भी भाग में 1 नवंबर को पूर्ण प्रदोष काल में अमावस्या की प्राप्ति नहीं है अतः 1 नवंबर को किसी भी मत से दीपावली मनाना शास्त्रोचित नहीं है।

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