
(जे के मिश्र) : छत्तीसगढ़ में आयोजित व्यापम द्वारा संचालित प्रयोगशाला सहायक और तकनीशियन की भर्ती परीक्षा में हजारों युवाओं के अनुपस्थित रहने से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रविवार को हुई इस परीक्षा में कुल 35,518 उम्मीदवार पंजीकृत थे, लेकिन इनमें से 20,310 ने परीक्षा में शामिल होने के बजाय अपनी सीट छोड़ दी। पूरे दिन यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा।
क्यों नहीं आए प्रतियोगी?
व्यापम की इस परीक्षा में अभ्यर्थियों के न आने की वजह क्या थी? क्या यह निशुल्क आवेदन योजना का असर है, या फिर युवाओं का अब इन परीक्षाओं में रूचि नहीं रह गई है? बिलासपुर के 80 परीक्षा केंद्रों पर इस परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें सुबह और दोपहर की दो पालियों में परीक्षाएं हुईं। लेकिन बड़ी संख्या में अनुपस्थिति ने सभी को चौंका दिया है। शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।
युवाओं के लिए बड़ी चेतावनी
इस घटना को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का परीक्षा में शामिल न होना सरकारी नौकरियों के प्रति उनकी उदासीनता का संकेत हो सकता है। स्कूलों और कॉलेजों में भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा रही, क्योंकि इस तरह की घटनाएं युवाओं के भविष्य के लिए खतरे की घंटी बजा रही हैं।
परीक्षा केंद्रों पर सन्नाटा
जहां आमतौर पर प्रमुख परीक्षा केंद्रों जैसे कि सीएमडी पीजी कॉलेज, कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय, डीपी विप्र पीजी कॉलेज, देवकीनंदन उच्चतर माध्यमिक शाला और मिशन स्कूल में परीक्षार्थियों की भारी भीड़ देखी जाती थी, इस बार ये केंद्र खाली-खाली नजर आए। परीक्षा कक्षों में आधे से भी कम परीक्षार्थी उपस्थित थे, जो एक चिंताजनक संकेत है।
कोई नकल प्रकरण नहीं
इस परीक्षा में कोई नकल की घटना दर्ज नहीं की गई, और व्यापम द्वारा गठित उड़नदस्ता ने विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण कर शांतिपूर्ण माहौल में परीक्षा संपन्न कराई। परीक्षा में शामिल होने के लिए परीक्षार्थियों को पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य था, और प्रवेश से पहले कड़ी सुरक्षा जांच भी की गई थी।
परीक्षा आंकड़े
प्रयोगशाला सहायक (प्रथम पाली): कुल पंजीकृत – 19,796, उपस्थित – 8,863, अनुपस्थित – 10,933
प्रयोगशाला तकनीशियन (द्वितीय पाली): कुल पंजीकृत – 15,722, उपस्थित – 6,345, अनुपस्थित – 9,377
सिविल जज परीक्षा में दिखा उत्साह
जहां व्यापम की परीक्षा में परीक्षार्थियों की अनुपस्थिति ने सभी को चौंका दिया, वहीं लोक सेवा आयोग की सिविल जज मुख्य परीक्षा में प्रतियोगियों का उत्साह देखने को मिला। प्रथम पाली में आयोजित इस परीक्षा में 188 प्रतियोगी पंजीकृत थे, जिनमें से 181 ने पर्चा हल किया, और सिर्फ सात प्रतियोगी अनुपस्थित रहे।
यह घटनाक्रम राज्य में शिक्षा और सरकारी नौकरी की परीक्षा प्रणाली के प्रति युवाओं की सोच में आए बदलाव की ओर इशारा करता है, और इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
Author: Deepak Mittal










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