
बिलासपुर। अंबिकापुर के कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल में 12 वर्षीय छात्रा अर्चिशा सिन्हा ने टीचर की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली अर्चिशा ने फांसी लगाकर अपनी जान दी। उसने अपने सुसाइड नोट में टीचर द्वारा लगातार मानसिक उत्पीड़न और दोस्तों के सामने उसका मजाक उड़ाने के आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने टीचर के खिलाफ केस दर्ज किया। टीचर ने इस चार्जशीट को रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
7 फरवरी 2024 को अंबिकापुर के कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल में यह हृदयविदारक घटना घटी। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने शिक्षिका सिस्टर मर्सी उर्फ एलिजाबेथ जोस के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश की।
आरोपित शिक्षिका ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस चार्जशीट को निरस्त करने की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। हाईकोर्ट ने शिक्षिका की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार क्रूरता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है, चाहे वह अनुशासन के नाम पर ही क्यों न हो।
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि बच्चों को शारीरिक और मानसिक दंड से उनके जीवन पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस तरह की प्रताड़ना न सिर्फ बच्चों को बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी आघात पहुंचाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंसा का कोई भी रूप जो बच्चों को शारीरिक या मानसिक रूप से क्षति पहुंचाता है, वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आता है।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी प्रकार के शारीरिक, मानसिक और अपमानजनक व्यवहार से निपटने के लिए उचित विधायी, प्रशासनिक, सामाजिक और शैक्षिक उपाय किए जाएं।
अर्चिशा के पिता आलोक कुमार सिन्हा एक इंजीनियर हैं और उनकी बेटी अर्चिशा उनकी इकलौती संतान थी। घटना की रात को, जब अर्चिशा के माता-पिता सो रहे थे, उसने अपने कमरे में पंखे से लटककर जान दे दी। उसके सुसाइड नोट में लिखा था कि उसकी टीचर उसे कई दिनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी और कक्षा में दोस्तों के सामने उसे अपमानित करती थी। इस घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया और शिक्षण संस्थानों में बच्चों के साथ हो रहे बर्ताव पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Author: Deepak Mittal










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