लेखा अधिकारी का नंबर बदल ठेकेदार को 30 लाख का भुगतान
नव भारत टाइम्स 24 x 7 के ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट:
लोक निर्माण विभाग (PWD) के संभाग क्रमांक दो में एक गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विभाग के कार्यपालन अभियंता अरविंद चौरसिया द्वारा लेखा अधिकारी का मोबाइल नंबर बदलकर ठेकेदार को 30 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। चीफ इंजीनियर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए टीम गठित कर दी है और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावना है।
फर्जी भुगतान का मामला:
सरकारी आवास और संस्थानों की मरम्मत के लिए शासन द्वारा हर साल लोक निर्माण विभाग को करोड़ों रुपये का फंड जारी किया जाता है। इसी फंड का दुरुपयोग करते हुए अरविंद चौरसिया ने लेखा अधिकारी का मोबाइल नंबर बदलवाकर ठेकेदार को 30 लाख रुपये का फर्जी भुगतान किया। ये मामला तब सामने आया जब लेखा अधिकारी नृत्या मंडल ने नियमों के खिलाफ बिल होने के कारण उसे लौटा दिया।
गड़बड़ी का खुलासा:
ये मामला वेयर हाउस रोड स्थित हाई कोर्ट जज बंगले और हाई कोर्ट के तृतीय तल में विभिन्न निर्माण कार्यों से संबंधित है। अनुबंध क्रमांक 121, 122, और 123 के तहत इन कार्यों में गड़बड़ी की गई। ठेकेदार मां लक्ष्मी एजेंसी के प्रोपाइटर प्रियांश द्विवेदी को काम पूरा होने की बात कहकर भुगतान किया गया था।
जांच का आदेश:
चीफ इंजीनियर संजय कोर्राम ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है। इसके अलावा, इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने की भी संभावना है।
संभागीय अधिकारीयों की भूमिका:
अरविंद चौरसिया (ईई) ने खुद ही माप पुस्तिका भरकर बिल लेखा कार्यालय को भेजा और लेखा अधिकारी का मोबाइल नंबर बदलवाकर ओटीपी हासिल किया। वाईएनके शास्त्री (एसडीओ) और राजेंद्र मिंज (सब इंजीनियर) की भी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने कार्य का सत्यापन और मूल्यांकन किया जबकि कार्य पूरा नहीं हुआ था।
वर्जन:
मामले की जांच चीफ इंजीनियर के आदेश पर की जा रही है। अगर आपको इस संबंध में कोई जानकारी या दस्तावेज चाहिए तो चीफ इंजीनियर की अनुमति लेकर ले सकते हैं l
Author: Deepak Mittal












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