शौर्य स्मृति कप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को नहीं मिला मैन ऑफ द सीरीज

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शौर्य स्मृति कप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को नहीं मिला मैन ऑफ द सीरीज

(सिविक एक्शन के तहत पुलिस विभाग ने किया आयोजन)

( पुरस्कार वितरण में नहीं बरती गई पारदर्शिता )

राजेन्द्र सक्सेना जिला प्रमुख दंतेवाड़ा 94255 94944 नवभारत टाइम्स 24×7.in

 

 

 

दंतेवाड़ा — वीर बलिदानी जवानों की स्मृति में दंतेवाड़ा पुलिस एवं जिला प्रशासन के तत्वधान में शौर्य स्मृति कप का आयोजन किया गया. इस कप में गीदम ने कब्ज़ा जमा लिया है. इस टूर्नामेंट में 32 टीमों ने हिस्सा लिया था. दस दिन चले इस आयोजन का फाइनल 3 जुलाई को खेला गया जिसमें गीदम ने डीआरजी को मात देते शौर्य स्मृति कप अपने नाम कर लिया. पहला पुरस्कार दो लाख रुपए और ट्रॉफी रखा गया और उपविजेता को एक लाख व ट्रॉफी रखा गया था. लेकिन अब इस टूर्नामेंट में पक्षपात के आरोप लग रहे हैं. पूरे टूर्नामेंट में सभी क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले गौरव चौहान को उनकी परफॉर्मेंस के अनुसार पुरस्कृत नहीं किया गया. पुलिस द्वारा आयोजित इस टूर्नामेंट में पुरस्कार वितरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खेल प्रेमियों की माने तो मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को ना देकर डीआरजी के खिलाड़ी रवि ठाकुर को दिया गया. जबकि किरंदुल के गौरव ने सभी क्षेत्रों में रवि ठाकुर से बेहतर प्रदर्शन किया था। इन दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो रवि ने चार पारियों में 18.25 के औसत से केवल 73 रन बनाए। जबकि गौरव ने चार पारियों में रवि से दोगुनी 34.67 के औसत से 104 रन बनाए जिसमें एक महत्तपूर्ण अर्धशतक भी शामिल है. वहीं गेंदबाजी में रवि और गौरव दोनों ही खिलाड़ियों ने सात सात विकेट लिए. गौरव ने चार ही मैच खेले जबकि रवि पांच खेलकर भी उनकी बराबरी तक नहीं कर पाया. आंकड़ों को देखा जाए तो गौरव ने इस पूरे टूर्नामेंट में रवि से 31 रन अधिक बनाए और दोनों ने सात सात विकेट लिए हैं. लीडरबोर्ड के चार्ट में भी गौरव को 23.4 अंक प्राप्त जबकि रवि को 21.1। इसके बावजूद पता नहीं किस गणित के अनुसार आयोजकों ने गौरव के स्थान पर रवि को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना। आयोजन के समापन के बाद से ये मामला खेल प्रेमियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि हो सकता है आयोजकों ने पुरस्कार वितरण में डकवर्थ लुईस नियम लागू किया हो। क्योंकि आंकड़ों के अनुसार तो इसके हकदार किरंदुल टीम के गौरव चौहान थे। वैसे इस टूर्नामेंट में बाउंड्री के पास लिया गया कैच भी चर्चा का विषय बना रहा। जिसमें फील्डर ने बाउंड्री के बाहर से बाल को अंदर फेंका और अंपायर ने आउट दे दिया जबकि वो सिक्स था। और अब पुरस्कार वितरण में पक्षपात इस आयोजन की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।

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Author: Deepak Mittal

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