अटल विश्वविद्यालय और डीपी विप्र कॉलेज में बढ़ी तकरार, स्वशासी का मुद्दा गरमाया
नव भारत टाइम्स 24 x 7 के ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट:
बिलासपुर। अटल विश्वविद्यालय और डीपी विप्र पीजी महाविद्यालय प्रशासन के बीच स्वशासी (आटोनामी) के मुद्दे पर तकरार अब और बढ़ चुकी है। विश्वविद्यालय जहां यूजीसी के माध्यम से पुनः समीक्षा की बात कर रहा है, वहीं कॉलेज प्रशासन आयोग के पत्र का हवाला देकर अपने अधिकार की मांग कर रहा है।
मंगलवार को कुलसचिव ने एक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अभी तक कॉलेज को स्वशासी अधिसूचित नहीं किया गया है। दूसरी ओर, डीपी विप्र पीजी महाविद्यालय प्रशासन समिति के सदस्य और आटोनामस सेल के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने हाल ही में प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि विश्वविद्यालय शिक्षा को प्रोत्साहित करने के बजाय उसे बाधित कर रहा है। उनके अनुसार कुलपति यूजीसी के आदेश को भी नहीं मान रहे हैं, जो अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। उन्होंने कुलपति पर कॉलेज के विकास में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया।
अग्रवाल के मुताबिक, कुलपति के आपत्तिजनक और निजी स्वार्थ से प्रेरित कदमों से असंतोष बढ़ रहा है। आटोनामस का दर्जा मिलने के बाद कुलपति द्वारा कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाना और अवैधानिक निर्णयों से सदस्यों को भ्रमित करना भी आपत्तिजनक है।
इस विवाद के बीच, मंगलवार को कुलसचिव कार्यालय से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर डीपी विप्र पीजी महाविद्यालय पर स्वशासी होने का भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया गया। विज्ञप्ति में कुलपति के खिलाफ की गई अनुचित और अशोभनीय टिप्पणियों की निंदा की गई। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि स्वशासी अधिसूचित नहीं किया गया है, जिससे यह मामला और बढ़ सकता है।
संस्थाओं के दावे
डीपी विप्र कॉलेज
प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला ने कहा:
कॉलेज को आटोनामस का दर्जा प्राप्त है।
इसी सत्र में इसी नियम से प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
विश्वविद्यालय असंवैधानिक कार्य कर रहा है, जो गलत है।
यूजीसी नियमों की अवहेलना हो रही है, जिससे विवि का अनुदान बंद हो सकता है।
हम अपने अधिकार की लड़ाई जारी रखेंगे।
अटल विश्वविद्यालय
कुलसचिव शैलेंद्र दुबे ने कहा:
स्वशासी अधिसूचित नहीं किया गया है।
प्रवेश के नियमों का पालन करना आवश्यक है।
हम नियमानुसार काम कर रहे हैं और कार्यपरिषद व आयोग को अवगत कर रहे हैं।
अनुशासन का निर्णय यूजीसी करेगी।
छात्रहित को प्राथमिकता दी जाएगी और आयोग को सही जानकारी देना हमारा कर्तव्य है।
छात्रों पर असर
इस विवाद के चलते छात्र-छात्राओं को बड़ा नुकसान हो सकता है, क्योंकि प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो मामला गंभीर हो सकता है। छात्र संगठन भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो चुके हैं। अब देखना यह है कि यह विवाद कहां तक खिंचता है और उच्च शिक्षा जगत में कुलपति पर की गई टिप्पणी के बाद मामला कितना गरमाता है।
Author: Deepak Mittal












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