तिलाईपाली से कोयला चोरी कर रेल साईडिंग की बजाए खेतों में डंप कर दिया जा रहा था कोयला..

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Deepak Mittal

तिलाईपाली से कोयला चोरी कर रेल साईडिंग की बजाए खेतों में डंप कर दिया जा रहा था कोयला..

शैलेश शर्मा 9406308437 नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला ब्यूरो रायगढ़ 

 

शिकायत पर घरघोड़ा राजस्व, माइनिंग, पुलिस, प्रशासनिक अमले की संयुक टीम ने दल बल के साथ मौके पर दी दबिश…मौके पर लगभग 8 ट्रक ( ट्रिप) कोयला सहित 2 लोडर 1 ट्रेलर को मौके पर पकड़ा गया…सफेद पोश नेता के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप? या निजी स्वार्थ के लिए स्वच्छ छवि वाले मंत्री जी के नाम को कर रहे बदनाम? मामले को रफा दफा करने के लग रहे आरोप…कोल माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण ? या प्रशासनिक नुमाइंदों की सरपरस्ती में हो रही कोयले तस्करी?

 

घरघोड़ा /विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक घरघोड़ा अंचल में कई कोल माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं, ये कोल माफिया माइंस के अधिकारी और कर्मचारी से सांठ गांठ कर कोयला चोरी करते आ हैं। काले हीरे के अवैध कारोबार में माइंस अधिकारी- कर्मचारी, खनिज विभाग, पुलिस , स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों की भूमिका बहुत संदिग्ध नजर आ रही है। जानकारो की माने तो विभागीय नुमाइंदों और स्थानीय प्रशासन की सरपस्ती में चल रहे इस काले हीरे के खेल में कुछ सफेद पोश नेता भी शामिल हैं।

जो निजी स्वार्थ के लिए चंद बोटी नुमा रिश्वत के आगे नतमस्तक होकर घरघोड़ा अंचल के इन कोल माफियाओ को खुला संरक्षण दे रहे हैं। जिले में छोटे बड़े कई उद्योग स्थापित हैं जिनको कोयले की आपूर्ति में सदैव कमी रहती है। कोल माफिया पहले माइंस से लोड कर निकलने वाली गाड़ियों से कोयला डंप करते हैं फिर इस चोरी के कोयले को आस पास के छोटे बड़े उद्योग और ईट भट्ठों में खपाते है।

स्थानीय उद्योग मालिक भी आपूर्ति पूर्ण करने कम कीमत पर कोयला खरीद लेते हैं। सूत्रो का दावा है कि कोयला चोरी से प्राप्त धन का पूर्व से तय किया एक निश्चित हिस्सा सभी जिम्मेदार नुमाइंदों को समय समय पर पहुंचाई जाती है।कोयला चोरी कर उद्योग में तस्करी करने वाले कोल माफियाओं के इस काले कारोबार की जानकारी सर्व विदित है तथा कोयला चोरी और तस्करी की खबरे भी प्रकाशित होती रहती है।

 

जिम्मदारों की समाचार में किरकिरी होने पर अथवा शिकायत आने पर गाहे बगाहे पुलिस, खनिज और प्रशासन की कारवाही भी देखने को मिलती है लेकिन यह केवल खानापूर्ति नजर आती है। कोयला तस्कारी करते जब भी कोई गाड़ी पड़कती है तो वाहन चालक को आरोपी बनाया जाता है और मालिक बेकसूर? तस्करी का कोयला कहां से आया? किसने कोयला चोरी की? जिस स्थान पर कोयला डंप हुआ उसका मालिक कौन ? किसके ऑडर पर कोयला लोड किया? वाहन कहां खाली होनी थी?

 

जैसे कई महत्त्वपूर्ण सवालो का जवाब मिलता ही नहीं और मामले की लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।सत्ता चाहे किसी जिसकी भी हो लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इन कोल तस्करी की तूती बोलती है। जब भी इन कोल माफियाओं पर पुलिस या प्रशासन हाथ डालता है तो फिर इनकी फोन की घंटियां बजने लगती हैं और कोल माफियाओं के राजनैतिक रसूख के आगे घुटने टेक मामले में लीपापोती कर दिया जाता है।रायगढ़ जिले के कोल माफियाओं में आपसी प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की लड़ाई भी जग जाहिर है।

 

इस काले हीरे के अवैध कारोबार से जुड़े कोल माफिया आए दिन एक दूसरे की टांग खींचते रहते है । पूर्व मे कई बार गैगवार भी देखने को मिल चूका है।ऐसा ही एक ताजा मामला शनिवार को सामने आया है जिसमें एनटीपीसी तिलाइ तिलाईपाली से कोयला चोरी कर रेल साईडिंग की बजाए खेतों में डंप कर दिया जा रहा था कोयला..

 

 

शिकायत पर घरघोड़ा राजस्व, माइनिंग, पुलिस, प्रशासनिक अमले की संयुक टीम ने दल बल के साथ मौके पर दी दबिश…मौके पर लगभग 8 ट्रक ( ट्रिप) कोयला सहित 2 लोडर 1 ट्रेलर को मौके पर पकड़ा गया…सफेद पोश नेता के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप? या निजी स्वार्थ के लिए स्वच्छ छवि वाले मंत्री जी के नाम को कर रहे बदनाम? मामले को रफा दफा करने के लग रहे आरोप…कोल माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण ? या प्रशासनिक नुमाइंदों की सरपरस्ती में हो रही कोयले तस्करी?

 

घरघोड़ा /विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक घरघोड़ा अंचल में कई कोल माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं, ये कोल माफिया माइंस के अधिकारी और कर्मचारी से सांठ गांठ कर कोयला चोरी करते आ हैं। काले हीरे के अवैध कारोबार में माइंस अधिकारी- कर्मचारी, खनिज विभाग, पुलिस , स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों की भूमिका बहुत संदिग्ध नजर आ रही है। जानकारो की माने तो विभागीय नुमाइंदों और स्थानीय प्रशासन की सरपस्ती में चल रहे इस काले हीरे के खेल में कुछ सफेद पोश नेता भी शामिल हैं।

जो निजी स्वार्थ के लिए चंद बोटी नुमा रिश्वत के आगे नतमस्तक होकर घरघोड़ा अंचल के इन कोल माफियाओ को खुला संरक्षण दे रहे हैं। जिले में छोटे बड़े कई उद्योग स्थापित हैं जिनको कोयले की आपूर्ति में सदैव कमी रहती है। कोल माफिया पहले माइंस से लोड कर निकलने वाली गाड़ियों से कोयला डंप करते हैं फिर इस चोरी के कोयले को आस पास के छोटे बड़े उद्योग और ईट भट्ठों में खपाते है।

स्थानीय उद्योग मालिक भी आपूर्ति पूर्ण करने कम कीमत पर कोयला खरीद लेते हैं। सूत्रो का दावा है कि कोयला चोरी से प्राप्त धन का पूर्व से तय किया एक निश्चित हिस्सा सभी जिम्मेदार नुमाइंदों को समय समय पर पहुंचाई जाती है।कोयला चोरी कर उद्योग में तस्करी करने वाले कोल माफियाओं के इस काले कारोबार की जानकारी सर्व विदित है तथा कोयला चोरी और तस्करी की खबरे भी प्रकाशित होती रहती है।

 

जिम्मदारों की समाचार में किरकिरी होने पर अथवा शिकायत आने पर गाहे बगाहे पुलिस, खनिज और प्रशासन की कारवाही भी देखने को मिलती है लेकिन यह केवल खानापूर्ति नजर आती है। कोयला तस्कारी करते जब भी कोई गाड़ी पड़कती है तो वाहन चालक को आरोपी बनाया जाता है और मालिक बेकसूर? तस्करी का कोयला कहां से आया? किसने कोयला चोरी की? जिस स्थान पर कोयला डंप हुआ उसका मालिक कौन ? किसके ऑडर पर कोयला लोड किया? वाहन कहां खाली होनी थी?

 

जैसे कई महत्त्वपूर्ण सवालो का जवाब मिलता ही नहीं और मामले की लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।सत्ता चाहे किसी जिसकी भी हो लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इन कोल तस्करी की तूती बोलती है। जब भी इन कोल माफियाओं पर पुलिस या प्रशासन हाथ डालता है तो फिर इनकी फोन की घंटियां बजने लगती हैं और कोल माफियाओं के राजनैतिक रसूख के आगे घुटने टेक मामले में लीपापोती कर दिया जाता है।रायगढ़ जिले के कोल माफियाओं में आपसी प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की लड़ाई भी जग जाहिर है।

 

इस काले हीरे के अवैध कारोबार से जुड़े कोल माफिया आए दिन एक दूसरे की टांग खींचते रहते है । पूर्व मे कई बार गैगवार भी देखने को मिल चूका है।ऐसा ही एक ताजा मामला शनिवार को सामने आया है जिसमें एनटीपीसी तिलापाली से कोयला लोड कर रेलवे साइडिंग जाने वाली गाड़ीयो से कारिछापर के पास एक खेत में भारी पैमाने पर कोयला डंप किया जा रहा था। जिसकी एक व्यक्ति द्वारा फोटो वीडियो के साथ शिकायत करने पर स्थानीय प्रशासन के नेतृत्व मे प्रशासनिक अमले की संयुक टीम ने दल बल के साथ मौके पर दबिश दी जहां मौके पर लगभग 8 ट्रक (ट्रिप) कोयला सहित 2 लोडर 1 ट्रेलर पाया गया लेकिन सूत्र बताते हैं कि एक ही लोडर को थाने ले जाया गया तथा अन्य लोडर और 1 ट्रेलर किसी सफेद पोश नेता के फोन करने पर छोड़ दिया है और मामले की लीपापोती करने की बात सामने आ रही है।बता दे की वीडियो कारीछापर रेलवे साइडिंग के पास की बताई जा रही है।

 

वीडियो में प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम में एसडीएम, तहसीलदार, खनिज विभाग, पुलिस सहित अन्य अधिकारी दिखाई दे रहे हैं। लेकिन सभी इस मामले में कुछ भी बताने से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। जिस कारण इस मामले को लेकर घरघोड़ा सहित जिला मुख्यालय में भी इस बात की चर्चा गरम है कि वर्तमान समय मे कोल माफियाओं को प्रदेश सरकार का खुला संरक्षण मिल रहा है।

 

गौरतलब हो कि मामले को रफा दफा करने के चर्चाओ का बाजार गरम है। जिसमे नेता जी के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अमले द्वारा मौके से एक लोडर जप्त कर थाने ले जाया गया तथा अन्य एक लोडर और ट्रेलर को मौके पर ही छोड़ने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों भूमिका पर भी सवाल उठना लाजिमी है।बहरहाल कोयला चोरी इस मामले को कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या कोल माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा? या फिर प्रशासनिक नुमाइंदों की सरपरस्ती में चल रहा कोयला तस्करी का खेल? क्या कोयले चोरी से अर्जित आय में नेता जी का भी है हिस्सा?

 

या स्थानीय प्रशासन निजी स्वार्थ के लिए स्वच्छ छवि वाले नेता को बदनाम कर रहे ? शासन, प्रशासन और उक्त नेता को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए, जिससे कोयला चोरी पर लगाम लग सके अन्यथा इनकी चुप्पी भी कोयला चोरों को सहमति और संरक्षण करने की ओर इशारा करते हैं।।पाली से कोयला लोड कर रेलवे साइडिंग जाने वाली गाड़ीयो से कारिछापर के पास एक खेत में भारी पैमाने पर कोयला डंप किया जा रहा था। जिसकी एक व्यक्ति द्वारा फोटो वीडियो के साथ शिकायत करने पर स्थानीय प्रशासन के नेतृत्व मे प्रशासनिक अमले की संयुक टीम ने दल बल के साथ मौके पर दबिश दी जहां मौके पर लगभग 8 ट्रक (ट्रिप) कोयला सहित 2 लोडर 1 ट्रेलर पाया गया लेकिन सूत्र बताते हैं कि एक ही लोडर को थाने ले जाया गया तथा अन्य लोडर और 1 ट्रेलर किसी सफेद पोश नेता के फोन करने पर छोड़ दिया है और मामले की लीपापोती करने की बात सामने आ रही है।बता दे की वीडियो कारीछापर रेलवे साइडिंग के पास की बताई जा रही है।

 

वीडियो में प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम में एसडीएम, तहसीलदार, खनिज विभाग, पुलिस सहित अन्य अधिकारी दिखाई दे रहे हैं। लेकिन सभी इस मामले में कुछ भी बताने से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। जिस कारण इस मामले को लेकर घरघोड़ा सहित जिला मुख्यालय में भी इस बात की चर्चा गरम है कि वर्तमान समय मे कोल माफियाओं को प्रदेश सरकार का खुला संरक्षण मिल रहा है।

 

गौरतलब हो कि मामले को रफा दफा करने के चर्चाओ का बाजार गरम है। जिसमे नेता जी के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अमले द्वारा मौके से एक लोडर जप्त कर थाने ले जाया गया तथा अन्य एक लोडर और ट्रेलर को मौके पर ही छोड़ने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों भूमिका पर भी सवाल उठना लाजिमी है।बहरहाल कोयला चोरी इस मामले को कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या कोल माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा? या फिर प्रशासनिक नुमाइंदों की सरपरस्ती में चल रहा कोयला तस्करी का खेल? क्या कोयले चोरी से अर्जित आय में नेता जी का भी है हिस्सा?

 

या स्थानीय प्रशासन निजी स्वार्थ के लिए स्वच्छ छवि वाले नेता को बदनाम कर रहे ? शासन, प्रशासन और उक्त नेता को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए, जिससे कोयला चोरी पर लगाम लग सके अन्यथा इनकी चुप्पी भी कोयला चोरों को सहमति और संरक्षण करने की ओर इशारा करते हैं।।

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Author: Deepak Mittal

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