नव भारत टाइम्स 24 x 7 के ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट:
डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दिया था नारा, “दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेगा”
जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि भाजपा ने श्रद्धापूर्वक मनाई, जहां उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। डा. मुखर्जी का मानना था कि अंग्रेजों ने देश की संस्कृति और धरोहर को नष्ट करने के लिए ‘फूट डालो राज करो’ नीति का सहारा लिया था, जिसका वे हमेशा विरोध करते रहे। वे कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए संघर्षरत रहे, लेकिन इस बीच उनकी मृत्यु हो गई।
विधायक अमर अग्रवाल ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक शिक्षाविद और विचारक थे, जो अखंड भारत के रूप में पुनः भारत को देखना चाहते थे। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता (कोलकाता) में हुआ। उनके पिता का नाम सर आशुतोष मुखर्जी और मां का नाम योगमाया था। वे अपनी शिक्षा के दौरान होनहार रहे और 33 वर्ष की आयु में सबसे कम उम्र के कुलपति बने। डा. मुखर्जी 1929 में राजनीति में आए और उसी साल कलकत्ता विश्वविद्यालय क्षेत्र से बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए।
बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की और कश्मीर को लेकर नारा दिया “दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेगा” जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पूरा किया। कश्मीर से धारा 370 हटाई गई। उनका देश के लिए दिया योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता। हमें उनके बताए रास्तों और विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए, यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि डा. मुखर्जी 1941-42 में बंगाल प्रदेश में वित्त मंत्री रहे और 1944 में हिंदू महासभा के अध्यक्ष बने। उन्होंने 1946 में पश्चिम
Author: Deepak Mittal












Total Users : 8239638
Total views : 8287890