202 कोबरा द्वारा पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम श्रृंखला

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Deepak Mittal

नवभारत टाइम्स जिला बीजापुर ब्यूरो प्रमुख जरखान 6263448923             

 

202 कोबरा द्वारा पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम श्रृंखला

समाज के भटके युवाओं को मुख्यधारा से जुड़ने के लिए अनुठी पहल

नौकरी के अवसर तलाश रहे युवाओं को मदद, कॉलेज जाने वालें बच्चों के लिए कैरियर काउंसलिंग

बच्चों को खेल सामग्री एवं शिक्षण सामग्री का वितरण

 जिला बीजापुर के गंगलूर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पालनार, तकनीकी प्रगति और आधुनिक जीवन शैली व प्रवृत्तियों से दूर रहने वाले, आदिवासी संस्कृति और विरासत से समृद्ध गोंड लोगों की मुरिया उप-जनजाति का घर है। पालनार बीजापुर के कई अति नक्सल प्रभावित गांवों में से एक है, जो पिछले दो दशकों से डर और हिंसा के साये में है ।

दिसंबर 2023 में, पालनार में नवीन कैंप के स्थापना के बाद क्षेत्र में चौड़ी सड़क, मोबाइल टावर और बिजली आपूर्ति के द्वार खुल गए । कैंप पालनार में फिलहाल एफ/202 कोबरा और सीआरपीएफ की ए/222 समवाय तैनात हैं, जिसे समय-समय पर माओवादी विरोधी अभियानों के संचालन के लिए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस के रूप में प्रयोग किया जा रहा है । इसका उद्देश्य क्षेत्र को नक्सलवाद के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करना, स्थानीय लोगों के बीच सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा करना, समाज के भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाना और क्षेत्र में विकास और जीवन जीने के बेहतर अवसरों के लिए द्वार खोलना है ।

क्षेत्र में शिक्षा का स्तर काफी कम है, जिसका सीधा कारण शिक्षा और विकास की राह में माओवादियों का बाधा बनकर खड़े होना है । अशिक्षा के इस अंधकार को दूर करने के लिए एफ/202 कोबरा ने क्षेत्र के बच्चों को बुनियादी शिक्षा प्रदान करने के विचार की कल्पना की । कैंप में ही एक कक्षा चलाने का निर्णय लिया गया और कंपनी द्वारा निजी स्तर पर इसका प्रचार-प्रसार किया गया । साथ ही, स्थानीय बच्चों को कक्षा में भेजने के लिए सरपंच और गाँव के अन्य प्रमुख और शिक्षित व्यक्तियों से संपर्क किया गया ।

रोजना क्षेत्र के छोटे-छोटे बच्चों को कैम्प में चलाये जा रहे इस आकर्षक शिक्षण के तरीके एवं मनोरंज खेलकूद के लिए बच्चे कैम्प पहुचते है कुछ बच्चे तो पैदल ही 4-5 किलोमीटर की दूरी भी तय कर लेते हैं । 4 घंटे की खुली कक्षा में बच्चों के सीखने के लिए बहुत कुछ है। शिक्षण के आधुनिक विधियों में छात्र-केंद्रित शिक्षण, गतिविधि-आधारित शिक्षण, और समावेशी शिक्षण शामिल हैं। साथ ही, बेहतर और चिरकाल अधिगम के लिए श्रव्य-दृश्य साधन का भी प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है। बच्चे न केवल कक्षा में सीखते हैं, बल्कि वे कई मनोरंजक गतिविधियों और मजेदार खेलों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं, जिससे कक्षा का माहौल खुशनुमा रहता है। इससे उन्हें अपने कौशल को निखारने और अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है । साथ ही शिक्षण में जुड़े जवानों के संलग्न होने से इन सुदुर क्षेत्र के बच्चों की बड़े मंच पर बातचीत करने की झिझक भी दूर हो रही है।

इसके अलावा, इन कोबरा के जवानों द्वारा क्षेत्र के लोगों के लिए कई अन्य गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं जैसे कि बेहतर नौकरी के अवसर खोजने में मदद करने के लिए क्षेत्र के कॉलेज जाने वाले छात्रों की कैरीयर काउंसलिंग, क्रिकेट के बल्ले और गेंद तथा वॉलीबॉल जैसे खेल के सामान का वितरण ।

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Author: Deepak Mittal

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