नव भारत टाइम्स 24 x7 ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में जातिगत और सामाजिक समीकरण की अहमियत को मानते हुए, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने इसे विशेष महत्व दिया है। प्रदेश की न्यायधानी के नाम से मशहूर बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां विभिन्न जातियों का एक संघर्ष और गहराई से समझौता होता है। इस क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग की बहुलता है, जिसके लिए दोनों दलों ने अपनी रणनीतिकारिता को ध्यान में रखा है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने पहले दिन से ही जातिगत समीकरण को महत्वपूर्ण मानते हुए काम किया है। बिलासपुर क्षेत्र के राजनीतिक माहौल में बिल्कुल वातावरण का अनुसरण किया गया है।
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग की बहुलता है। यहां वर्ष 1997 से लेकर आज तक कोई भी दूसरा दल इस सीट पर अपना पैर जमा नहीं पा सका है। विभिन्न जातियों के मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए, भाजपा और कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और उनके प्रत्याशी का चयन भी इस आधार पर किया गया है।
ओबीसी वर्ग को ध्यान में रखते हुए, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भाजपा ने बीते 15 वर्षों से साहू समाज से प्रत्याशी उतारते रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने भी इस बार भाजपा को चुनौती देने का फैसला किया है। दोनों दलों के रणनीतिकारों ने जातिगत समीकरण को साधने के लिए अपने प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार में जुटाया है।
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा किसानों को अपनी ओर करने का प्रयास कर रही है। किसानों के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों के हित में कई योजनाएं घोषित की हैं।
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में अन्य जातियों के मतदाताओं के बीच भी ध्यान दिया जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी रणनीति में विभिन्न जातियों के प्रति ध्यान दिया है और उनके मुद्दों को समझने की कोशिश की है।
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरण को महत्वपूर्ण मानते हुए, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अपनी रणनीतिकारिता को इस दिशा में अद्यतन किया है और प्रत्याशियों का चयन भी इस आधार पर किया गया है।






Author: Deepak Mittal










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