March 25, 2024

अशोक आकाश की कविता *समय धूल सा परत जमाता* सार छंद मात्रा भार- 16-12

  जीवन अपना सहज बनाएं, तोड़ सख्त जंजीरें । समय धूल सा परत जमाता, खींचो तीव्र लकीरें ।। रुक सकती क्या कभी जवानी, नदिया रोको

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