पुनर्गठित होंगी जिले की 16 पुरानी सहकारी समितियाँ, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

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जे के मिश्र,
जिला ब्यूरो चीफ,
नवभारत टाइम्स24*7in, बिलासपुर

बिलासपुर। जिले की 16 पुरानी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को पुनर्गठित कर 16 नई समितियों का गठन किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को अधिक सुगमता और पारदर्शिता के साथ सेवाएं प्रदान करना है। इस संबंध में सूचना 3 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी की गई है।

प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, अब प्रभावित सहकारी समितियों से अलग होकर नई समितियाँ काम करेंगी, जिससे किसानों को अपने गांवों के नजदीक ही सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे न केवल समय और दूरी की परेशानी कम होगी, बल्कि धान खरीदी जैसी प्रक्रियाओं में भी आसानी होगी। इसके अंतर्गत कोटा, सकरी, तखतपुर, बिल्हा, मस्तूरी जैसे ब्लॉकों के कई गांवों को नई समितियों में शामिल किया गया है।

मुख्य बिंदु –

नई समितियों में अकलतरी, बेलतरा, लमेर, आमली, कोडपुर, नवगांव (चुमक्का), पंडरिया, पोड़ी, पचरा, दारासरसा, सरसिनी, शिवटिकारी, आमगांव, सुकुलकारी, जलसरा, और धनगांव को शामिल किया गया है।

इससे प्रभावित पुरानी समितियों में बांध, सकरी, चुटका, कोटा, कुरेली, भररी, तखतपुर, चपोरा, बेलगहना, जैजपुर, जोहर, मित्तूचकगांव, आदि हैं।

प्रकाशन के साथ ही राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह योजना तभी प्रभावशील मानी जाएगी जब तक इन समितियों को वैध रूप से अलग घोषित नहीं किया जाता। इस योजना में पुनर्गठन की नीति, प्रक्रिया और परिभाषाएँ स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं।

पुनर्गठन का उद्देश्य:

समितियों के माध्यम से गांवों को निकटता में सहकारी सेवाएं देना।

धान खरीदी, उर्वरक वितरण, ऋण वितरण जैसी व्यवस्थाओं को और सरल बनाना।

किसान सदस्यों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर के अंतर्गत संचालित इन समितियों के पुनर्गठन से आने वाले खरीफ और रबी सीजन में किसानों को काफी सहूलियत मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे राज्य की सहकारी व्यवस्था को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

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Author: Deepak Mittal

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