हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे बलौदाबाजार हिंसा की जांच, तत्कालीन कलेक्टर-एसपी सस्पेंड

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नव भारत टाइम्स 24 x 7 के ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट:

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में हुई हिंसा को रोकने में असफल रहने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्कालीन कलेक्टर और एसपी को सस्पेंड कर दिया है। गुरुवार देर रात जारी आदेश में, तत्कालीन कलेक्टर के.एल. चौहान और एसपी सदानंद कुमार को निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि हिंसा के बाद दोनों अधिकारियों को बलौदाबाजार से हटा दिया गया था।

निलंबन के आदेश

राज्य सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि निलंबन की कार्रवाई हिंसा के दौरान शिकायत पर उचित एक्शन नहीं लेने के कारण की गई है। सतनामी समाज द्वारा जैतखाम को क्षति पहुंचाने की शिकायत करने के बाद उचित कार्रवाई नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस लापरवाही के चलते निलंबन का आदेश जारी किया है।

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे जांच

बलौदाबाजार में हुई हिंसा की जांच के लिए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सीबी बाजपेयी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। यह एकल सदस्यीय जांच टीम छह बिंदुओं पर जांच करेगी और अगले तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

कांग्रेसी नेताओं का दौरा

आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, चरणदास महंत, दीपक बैज सहित कई कांग्रेसी नेता बलौदाबाजार पहुंचे। उन्होंने घटना की जांच के बाद पार्टी को रिपोर्ट देने की बात कही है। इससे पहले कांग्रेस की सात सदस्यीय जांच टीम ने घटना स्थल का दौरा किया और जांच की। टीम के संयोजक और पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने बताया कि जैतखाम को क्षतिग्रस्त किया गया था, लेकिन एफआईआर नहीं हुई।

घटना की पृष्ठभूमि

जानकारी के अनुसार, 15 मई की देर रात सतनामी समुदाय के धार्मिक स्थल गिरौदपुरी धाम से करीब 5 किमी दूर मानाकोनी बस्ती स्थित बाघिन गुफा में असामाजिक तत्वों ने धार्मिक चिन्ह जैतखाम को क्षति पहुंचाई थी। इस घटना की शिकायत और समाज के लोगों द्वारा प्रदर्शन के बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लेकिन समाज के लोगों का आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग असली आरोपी नहीं हैं और असली दोषियों को बचाया जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा

9 जून को सतनामी समाज ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी। 10 जून को प्रदर्शन के दौरान भीड़ उग्र हो गई और हिंसा का रूप ले लिया। उग्र भीड़ ने कलेक्टरेट और एसपी कार्यालय में तोड़फोड़ की, सैकड़ों वाहनों में आग लगा दी और कलेक्टरेट भवन को भी आग के हवाले कर दिया। इस घटना में लगभग 120 साल पुराना राजस्व रिकॉर्ड जलकर खाक हो गया।

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Author: Deepak Mittal

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