छत्तीसगढ़ की छोटी-सी लहर वैश्विक मंच तक पहुंची, बालोद जिले के लिए गौरव का क्षण
दल्लीराजहरा/डौंडीलोहारा ,छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डोंडी लोहारा विकासखंड स्थित छोटे से गांव सोरली की बेटी साधना यदु ने अपनी आत्मीय अभिव्यक्ति से प्रदेश को गौरवान्वित करने का दावा किया है। नोबेल पुरस्कार 2026 से जुड़े आधिकारिक डिजिटल पृष्ठों पर उनकी अभिव्यक्ति को दो बार स्थान मिलने की जानकारी सामने आई है। इसे गांव से वैश्विक मंच तक पहुंचती प्रतिभा और रचनात्मक सोच के रूप में देखा जा रहा है।
नोबेल सप्ताह के दौरान साधना यदु ने पुरस्कार से जुड़ी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, “समुद्र को तो सब देखते हैं, पर इस बार छत्तीसगढ़ की छोटी-सी लहर भी 2026 के नोबेल इतिहास में दर्ज हो गई।” उनकी इस अभिव्यक्ति में अपने प्रदेश और मिट्टी के प्रति गर्व की झलक दिखाई देती है।
साधना यदु के अनुसार, उनकी अभिव्यक्ति को नोबेल पुरस्कार संस्था के साहित्य और अर्थशास्त्र से जुड़े डिजिटल पृष्ठों पर स्थान मिला। इस अवसर पर उन्होंने संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे उत्सव को साझा करने हेतु नोबेल पुरस्कार संस्था का हृदय से आभार।
गांव सोरली से जुड़ी इस उपलब्धि की चर्चा स्थानीय स्तर पर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सकती है। यह संदेश भी देती है कि छोटे गांवों में रहने वाले लोगों की रचनात्मक अभिव्यक्ति व्यापक मंच तक पहुंच सकती है और अपनी अलग पहचान बना सकती है।
बालोद जिले के डोंडी लोहारा विकासखंड के सोरली गांव से जुड़ी साधना यदु की यह पहल छत्तीसगढ़ की प्रतिभा, आत्मविश्वास और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना को रेखांकित करती है।
Author: Deepak Mittal









