विशेष अपराधों में पागलपन के आधार पर आरोपित को नहीं दी जा सकती छूट
नवभारत टाइम्स 24 x 7 के ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट:
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोक्सो अधिनियम 2012 के तहत विशेष अपराधों में केवल पागलपन के आधार पर आरोपित को छूट नहीं दी जा सकती। संदेह से परे अपवादों को साबित करने का सिद्धांत कायम रहना चाहिए।
एनडीपीएस एक्ट के मामले में सख्त कार्रवाई की हिदायत देते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि नशे के सामान की तस्करी और बिक्री जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। जांच में किसी प्रकार की कमी या लापरवाही नहीं होनी चाहिए, ताकि आरोपितों को कोई लाभ न मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि नशा समाज की बुनियादी ढांचे को कमजोर करता है, और देश के भविष्य की सुरक्षा के लिए ऐसे अपराधों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन के अफसरों को निर्देशित किया कि सुरक्षा के लिए नशे के अपराधों से निपटना आवश्यक है। कोर्ट ने जांच में कमजोरी और लापरवाही की वजह से विचारण न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया है।
डीआरआइ (डायरेक्टोरेट ऑफ रेवन्यू इंटेलीजेंस) के अधिकारी को 19 सितंबर 2018 को सूचना मिली थी कि ट्रक क्रमांक- सीजी 04 7703 का उपयोग गांजा तस्करी के लिए किया जा रहा है। ट्रक में आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी से गांजा लेकर उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था। विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें बनाईं और छत्तीसगढ़ जीएसटी के कुछ अधिकारियों के साथ घेराबंदी की। ट्रक कोंडगांव के केशकाल घाटी के पास एक ढाबा में खड़ा था। पास ही एक कार क्रमांक यूपी 90 एन 5172 भी खड़ी थी। ग्रामीणों की उपस्थिति में ट्रक की जांच की गई। ट्रक में 482 बोरी नमक के अलावा 36 बैग मिले, जिसमें 1840 ग्राम गांजा था। सभी की जब्ती की गई। इस मामले में यूपी के बांदा निवासी चंद्रशेखर शिवहरे, शिवशंकर गुप्ता के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि डीआरआइ ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कानून के अनिवार्य प्रविधानों पर विचार करते हुए जांच नहीं की और अपने कर्तव्य में विफल रही है। इस कारण हमें अपील को स्वीकार करना पड़ा। डिवीजन बेंच ने फैसले की कापी डीआरआइ नागपुर के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।
Author: Deepak Mittal












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