अपने रामलला को देखने को आतुर श्रद्धालुओं को थोड़ा चैन तो शुक्रवार को ही आ गया, जब बालरूप धरे रामलला की स्यामल मनोहर छवि सामने आ गई. इस प्रतिमा के देखते ही वह सारे रूप, वह सारी व्याख्याएं एक-एक कर साकार सी होने लगीं, जिसका वर्णन संतों-कवियों ने अपने-अपने राम की छवि को गढ़ने में किया है.रामलला आ रहे हैं. आरती की थाल लगी हुई है. फूलों से गलियां-गलियां, द्वार-द्वार सजा लिए गए हैं. मंदिर भी सजकर तैयार है और गर्भगृह समेत देश-विदेश के अनगिनत श्रद्धालुओं की आंखें उस पल का साक्षी बनने को आतुर हैं, जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी और फिर जन-जन के राम शताब्दियों बाद अपने मंदिर में बस जाएंगे.
भक्तों-श्रद्धालुओं के सीने में तो उनका बसेरा पहले से है.
Author: Deepak Mittal









Total Users : 8171531
Total views : 8200172