जिला अस्पताल का आईसीयू बना मरीज के लिए जीवनदायिनी

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दुर्ग। कभी रिफर सेंटर कहा जाने वाला जिला अस्पताल अब समय के साथ मरीजों के लिए जीवनदायिनी बन गया है। इसका बड़ा उदाहरण अस्पताल के आईसीयू में सामने आया है। यहां जीवन व मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही एक मरीज लगभग 2 महीेने बाद डिस्चार्ज होकर सकुशल घर वापस लौट गई है। आईसीयू में लंबा ईलाज वह भी सारी सुविधाओं के साथ, फिर जिला अस्पताल के अन्य वार्डों में चिकित्सा सुविधा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसका सारा श्रेय जिला अस्पताल प्रबंधन, विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्टॉफ व जीवनदीप समिति के सेवाभावी सदस्यों को जाता है। मरीज के डिस्चार्ज होने पर परिजनों ने खुशियां जाहिर करते हुए चिकित्सकों की सेवा और अस्पताल की सुविधाओं की सराहना की है। मिली जानकारी के मुताबिक भिलाई सुपेला निवासी अंजलि ठाकुर 28 वर्ष पिता बल्ला ठाकुर 2 अप्रैल को उल्टी एवं मुंह में झाग आने की शिकायत पर जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती की गई। मरीज धीरे-धीरे बेसुध हो गई। मरीज के रिश्तेदार ने चिकित्सक को बताया कि मरीज ने कीटनाशक का सेवन किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीज को आईसीयू में डॉ. अनिल विवेक सिन्हा के निगरानी में भर्ती किया गया एवं मरीज को कृत्रिम सांस वेंटिलेटर के माध्यम दी गई। मरीज ईलाज के दौरान 1 माह तक वेंटिलेटर में रही। धीरे-धीरे मरीज की स्थिति में सुधार आया। फिर धीरे-धीरे मरीज से वेंटिलेटर का सपोर्ट भी हटाया गया। मरीज अंजलि ठाकुर के आईसीयू में पूर्ण रुप से स्वस्थ होने पर उसे लगभग 2 महीने बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। मरीज की जिला अस्पताल के आईसीयू में आईसीयू इंचार्ज डॉ.अनिल विवेक सिन्हा की निगरानी में उपचार किया गया। चिकित्सा सेवा में डॉ. रचना दवे,डॉ. शाहनेज,डॉ. अपूर्वा,डॉ. शाहीन, स्टॉफ नर्स श्रीमती कीर्ति निर्मलकर,श्रिया शर्मा,मनीषा,
गीता वर्मा,पल्लवी,
मुकेश,भावना,चित्रमाला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला अस्पताल के आईसीयू में सफलतापूर्वक ईलाज के लिए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. हेमंत साहू,जीवनदीप समिति के आजीवन सदस्य दिलीप ठाकुर,मानद सदस्य प्रशांत डोंगावकर ने आईसीयू विभाग के चिकित्सकों व स्टॉफ के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी है।

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Author: Deepak Mittal

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