बालोद जिले के ग्राम करकाभाट में स्थापित माँ दंतेश्वरी शक़्कर कारखाना के लिए गन्ना उत्पादन को बढ़ाने को लेकर प्रशासन द्वारा प्रयास किया जा रहा है लेकिन गन्ना किसानों को प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। जिले में प्रशासन द्वारा गन्ना किसानों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गन्ना का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित कर उन्हें विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ देने का भरोसा दिलाया जाता है लेकिन जब किसान योजना का लाभ लेना चाहते हैं तब उन्हें प्रशासन के लुभावने वादे मात्र खानापूर्ति नजर आने लगती है।
गन्ना किसानों को नहीं मिल रहा सुविधा :
किसानों से मिली जानकारी के अनुसार बीते जनवरी महीने में प्रशासन द्वारा गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए और किसानों की संख्या व उत्पादन बढ़ाने के लिए अनेक मुद्दे पर जोर दिया गया था और सामूहिक खेती में जोर देने के साथ ही योजना के तहत गन्ना खेतों की सुरक्षा के लिए जाली तार, गन्ना बीज और मोटरपंप की सुविधा नहीं है। पानी की कमी पड़ने पर नजदीक के जलाशयों से सिचाई की सुविधा देने की बात कहीं गईं थी लेकिन गन्ना किसानों के लिए प्रशासन की लाभकारी योजना जुमला बनकर रह गईं है। जिसके कारण किसान गन्ना के खेतों में मवेशी चराने को मजबूर हो गए हैं। अब किसान गन्ना की खेती करने से कतराने लगे हैं।
अन्य जिलों के भरोसे चल रहा कारखाना :
प्रशासन द्वारा किसानों की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ ही गन्ना की रकबा और उत्पादन में बढ़ोत्तरी करने के लिए अनेक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा योजना के तहत लाभ देने की बात कहीं जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। इस कारण किसान गन्ना की खेती करने से कतराने लगे हैं और उत्पादन में कमी आ रही है। गन्ना की कमी को दूर करने के लिए और शक़्कर कारखाना को चलाने के लिए अन्य जिलों से गन्ना लिया जाता है जिससे कारखाने में शक़्कर का उत्पादन किया जा रहा है लेकिन जिले में गन्ने का उत्पादन कम होने लगा है। गन्ना उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर योजनाओं का लाभ दिया जा सकता है और गन्ना का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है लेकिन प्रशासनिक घोषणा के बाद भी किसानों को लाभ नहीं दिया जाता जिसके कारण किसान गन्ना की खेती करने से किनारा करने लगे हैं।
कारखाना प्रबंधन द्वारा किसानों को नहीं मिलता सहयोग :
हीरो बाई, मनहर साहू, चरण नेताम,अंकलहीन नेताम ने बताया की गन्ना उत्पादन और रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को लाभ दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा पहल करने की बात की जाती है लेकिन जब किसान खेतों में फसल लगाते हैं तो उसे प्रशासन द्वारा कोई सहयोग नहीं मिलता है। प्रशासन द्वारा गन्ना किसानों को फसलों को बचाने के लिए तार फेंसींग, बोर खनन के साथ बिजली की समस्या होने पर ट्रांसफार्मर और पानी की कमी पड़ने पर नजदीकी जलाशयों से पानी सुविधा देने ही बात भी कहीं जाती है। गन्ना लगाने के बाद उन्हें यह सुविधा नहीं मिलती जिसके कारण किसान गन्ना की खेती में रूचि नहीं ले रहे हैं।
किसान ने बताई अपनी समस्या :
जिले के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक किसान दयानन्द साहू ने बताया की वर्तमान में कुल 70 एकड़ में गन्ना की खेती की जा रही है लेकिन वर्तमान में सामूहिक स्तर पर लगभग 20 एकड़ पर गन्ना की खेती की जा रही थी, जो बर्बाद हो चुकी है। इसमें तार जाली की सुविधा नहीं होने के कारण मवेशीयों का चारागाह बन चूका है। प्रशासन से उम्मीद होने के कारण दो बार गन्ना की खेती की गईं लेकिन योजना के तहत कोई भी लाभ नहीं मिला जिसके कारण खेतों में मवेशी चराने को मजबूर हूँ।
प्रशासन से पर्याप्त सुविधा दी जाती तो लगभग 40 एकड़ में और खेती करता लेकिन कोई सुविधा नहीं मिला रहा है। वर्तमान में खेतों में पानी की कमी बनी हुई है जिसके लिए बोर खनन और ट्रांसफार्मर की सुविधा देने के लिए प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया था तथा नजदीकी जलाशय से पानी देने के लिए प्रशासन द्वारा बात भी कही गई थी लेकिन जरूरत पड़ने पर जलाशय से सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण गन्ना बीज खेतों में खड़े खड़े सुखकर बर्बाद हो रहे हैं। अभी 40 एकड़ पर फसल लगाने का काम अधूरा पड़ा हुआ है और 20 एकड़ में लगा फसल भी बर्बाद हो चूका है। दूसरी ओर गन्ना बीज खेतों में पड़ा हुआ है जिसे कारखाना बंद होने के कारण अब लगभग 20 एकड़ का फसल नहीं बेच पा रहा है। वहीं तार जाली की सुविधा भी नहीं मिल पा रहा है जिसके कारण किसान बहुत ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं।




Author: Deepak Mittal









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