दीपक मित्तल नवभारत टाइम्स 24 x7in प्रधान संपादक छत्तीसगढ़
बालोद, कृषि विभाग द्वारा वर्षा ऋतु के आगमन को देखते हुए जिले के किसानों को सामयिक सलाह दी गई है। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि खरीफ वर्ष 2024 होने के साथ अधिकतर किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन खेत की जुताई की पूरा किया जा चुका है। जिसके साथ ही कुछ ही दिनों में खेत की तैयारी हेतु का कार्य प्रारंभ हो जायेगा। उन्होंने कहा कि जिले में कृषकों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अवकाश के दिनों में भी समितियों के माध्यम से उर्वरक तथा बीज का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने जिले के किसानों को मानसून के पूर्व खेतों की तैयारी हेतु आवश्यकतानुसार उर्वरकों का उठाव तत्काल पूरा करने को कहा है।
उपसंचालक कृषि ने बताया कि जिन कृषकों को डीएपी उपलब्ध नहीं हो पाया है वे डीएपी के स्थान पर एन पी के 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13 एवं सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग विकल्प के रूप में कर सकते हंै। उन्होंने बताया कि संचालनालय अनुसंधान सेवाएं इंदिरा गाधी कृषि महाविद्यालय रायपुर द्वारा डीएपी के विकल्प के रूप में सुझाव बताया गया है। जिसमें 16 प्रतिशत फास्फोरस के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक का प्रयोग कर सकते हैं। इसी तरह एक बोरी डीएपी से मिलने वाले तत्वों की पूर्ति हेतु लगभग आधा बोरी यूरिया तथा तीन बोरी सिंगल सुपर फास्फेटक का प्रयोग कर सकते हंै। इसी तरह मिश्रित उर्वरक के रूप में इफको 12ः32ः16, ग्रोमोर 28ः28ः0 तथा अन्य फास्फोरस युक्त मिश्रित उर्वरक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही मृदा में उपस्थित स्फूर की उपलब्धता में वृद्धि करने हेतु स्फूर घुलनकारी जैव उर्वरकों जिसमें पी.एस.बी. का प्रयोग भी किया जा सकता है।


Author: Deepak Mittal










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