रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 26 साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी और सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू शामिल हैं।
दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 25 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
EOW में दर्ज अपराध क्रमांक 19/2000 के अनुसार, वर्ष 1995 से 1998 के बीच जरूरतमंद लोगों के लिए संचालित सरकारी आवासीय योजना के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया। जांच में सामने आया कि 186 लोगों के नाम पर एक-एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था, जिससे कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि जारी की गई।
भौतिक सत्यापन के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रायपुरा और पंडरीकांचा क्षेत्रों में जहां मकान निर्माण दर्शाया गया था, वहां न तो कोई मकान मिला और न ही संबंधित लाभार्थी मौजूद पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि पूरी योजना केवल कागजों में ही संचालित की गई थी।
जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी प्रमाण पत्र लगाए और आपराधिक षड्यंत्र के तहत बिना किसी वास्तविक जांच के ऋण स्वीकृत एवं वितरित किए। बाद में उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए।
इस प्रकरण में नामजद दो अन्य आरोपी अब दिवंगत हो चुके हैं, जिससे जांच और जटिल हो गई है। EOW के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरोपी लंबे समय से फरार थे और नोटिस तामील होने के बावजूद अपने पते पर नहीं मिल रहे थे।
Author: Deepak Mittal










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