AI Tools :2025 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ बड़े-बड़े डेमो या एक्सपेरिमेंट तक सीमित नहीं रहा। आज AI ऐसे स्मार्ट टूल्स के रूप में सामने आ चुका है, जिन्होंने लोगों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। चाहे बिना कोड के ऐप बनाना हो, मार्केटिंग आइडिया को विज़ुअल देना हो या फिर नकली तस्वीरों की सच्चाई पकड़नी हो—AI हर मोर्चे पर इंसानों की मदद कर रहा है।
बिना कोड के AI ऐप, अब हर कोई बन सकता है क्रिएटर
पहले AI प्रोडक्ट बनाना केवल टेक्निकल टीम, जटिल APIs और भारी-भरकम बैकएंड सिस्टम का काम माना जाता था। लेकिन Google AI Studio की वाइब कोडिंग ने इस सोच को तोड़ दिया है।
अब यूज़र सिर्फ यह बताते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और सिस्टम अपने आप काम करने वाला AI ऐप तैयार कर देता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रोडक्ट मैनेजर और बिज़नेस लीडर मिनटों में टेक्स्ट, वीडियो और वेब सर्च को जोड़कर प्रोटोटाइप बना सकते हैं और इंजीनियरिंग टीम को शामिल करने से पहले ही आइडिया टेस्ट कर सकते हैं।
मार्केटिंग की सोच को तस्वीरों में बदलने वाला AI
मार्केटिंग टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है—एक आइडिया पर सबको सहमत कराना। Google Mixboard इस परेशानी को काफी हद तक खत्म करता है।
यह साधारण भाषा में दिए गए निर्देशों को एडिटेबल विज़ुअल बोर्ड में बदल देता है। लाइफस्टाइल इमेज, कलर कॉम्बिनेशन और बेसिक मॉकअप्स के जरिए टीमें जल्दी एक कॉमन दिशा तय कर पाती हैं, जिससे बार-बार बदलाव की जरूरत कम हो जाती है।
असली या नकली? अब तस्वीरें झूठ नहीं बोल पाएंगी
AI से बनी तस्वीरें अब इतनी असली दिखने लगी हैं कि उन पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। इसी खतरे को देखते हुए Google DeepMind का SynthID सामने आया है।
यह तकनीक AI-जनरेटेड इमेज में एक अदृश्य डिजिटल निशान जोड़ देती है, जो क्रॉपिंग, कंप्रेशन या फिल्टर लगाने के बाद भी बना रहता है। इससे मीडिया, बिज़नेस और क्रिएटर्स को यह पहचानने में मदद मिलती है कि तस्वीर असली है या AI की बनाई हुई।
डॉक्यूमेंट और प्रेज़ेंटेशन में AI बना सबसे बड़ा सहायक
Claude की नई फाइल क्रिएशन क्षमता उन प्रोफेशनल्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो डॉक्यूमेंट और प्रेज़ेंटेशन बनाने में घंटों बर्बाद कर देते थे।
यह टूल अपलोड किए गए डेटा को समझकर सीधे एक्सेल शीट, वर्ड रिपोर्ट या पावरपॉइंट प्रेज़ेंटेशन तैयार कर देता है। फॉर्मूला से लेकर लेआउट और पूरी स्टोरी तक AI खुद संभाल लेता है।
WhatsApp पर ही रिसर्च और फैक्ट चेक
अब रिसर्च के लिए अलग-अलग वेबसाइट खंगालने की जरूरत नहीं। Perplexity का WhatsApp इंटीग्रेशन यूज़र्स को सीधे चैट में सवाल पूछने, खबरों का विश्लेषण करने और किसी दावे की सच्चाई जांचने की सुविधा देता है।
खास बात यह है कि जवाब के साथ सोर्स भी मिलते हैं, जो चलते-फिरते काम करने वालों के लिए बेहद फायदेमंद है।
Author: Deepak Mittal










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