बिलासपुर जिले में न चालान-न लाइसेंस, फिर भी चल रहे बालू व गिट्टी के अवैध कारोबार….सरकारी खजाने और उपभोक्ताओं दोनों को लगा रहे चूना

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Deepak Mittal

जे के मिश्र जिला ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स 24*7in बिलासपुर

बिलासपुर : जिले में आये दिन नयी पुरानी कालोनियों में इमारतें खड़ी हो रही हैं. इन इमारतों को खड़ा करने में गिट्टी और बालू का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है. इसके लिए बकायदा पूरे जिले में सप्लायरों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी हैं. पर, जब कुछ ऐसे ही डिपो की पड़ताल की गयी, तो किसी के पास भी खनन विभाग का स्टॉकिस्ट लाइसेंस नहीं था. न चालान और न ही लाइसेंस, फिर भी यह काला धंधा शान से यहां चल रहा है. हालात यह है प्रतिदिन लाखों में हो रहे इस कारोबार से न तो सरकार को राजस्व मिल रहा है और न ही उपभोक्ताओं को राहत है. यानी सरकारी खजाने और उपभोक्ताओं दोनों को बालू-गिट्टी के अवैध कारोबारी चूना लगा रहे हैं और खुद मालामाल हो रहे हैं.

शहर से लेकर गांव तक फैला है अवैध कारोबार
गिट्टी-बालू की बिक्री बिना चालान और बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से हो रही है. बिलासपुर शहर से सकरी लेकर कोटा व तखतपुर तक में दर्जन भर अवैध डिपो हैं. यहां तक कि ईंट भट्ठा पर भी अवैध रूप से बालू को स्टॉक कर रखा गया है, जहां से ट्रैक्टर के माध्यम से उसकी बिक्री की जा रही है. इसके साथ बिलासपुर शहर ब सकरी रोड ,कोटा व तखतपुर मस्तुरी में भी कई अवैध डिपो का संचालन हो रहा है. इसके अलावा शहर के कई जगहों समेत अन्य दर्जनों जगहों पर यह गोरखधंधा चल रहा है.

जिम्मेदारों के मौन समर्थन से फल-फूल रहा धंधा
अवैध खनिज सामग्री बेचने के लिए खनन विभाग से स्टॉकिस्ट का लाइसेंस लेना अनिवार्य है. अगर इस कारोबार को कोई नियम विरुद्ध करता है तो खनन विभाग की टीम छापेमारी कर उसका स्टॉक जब्त कर उससे जुर्माना वसूल करेगी. इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर अवैध कारोबारियों के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है. पर, कार्रवाई के नाम पर यहां सिर्फ खानापूर्ति होती है. जगह-जगह सड़क किनारे आपको बालू व गिट्टी का स्टॉक दिख जायेगा, लेकिन जिम्मेदारों को यह दिखायी नहीं पड़ता है, जबकि सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर से बालू व गिट्टी की ढुलाई बिना चालान के होती है. पर, जिम्मेदार इन ट्रैक्टरों को पकड़ते तक नहीं है. जानकार बताते हैं कि खानन विभाग और संबंधित विभाग की मिलीभगत से यह कारोबार बिलासपुर शहर,कोटा , तखतपुर, मस्तुरी में फल-फूल रहा है.

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Author: Deepak Mittal

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