पत्नी को घर से निकाला, दूसरी महिला के साथ रहने लगा पति; हाईकोर्ट ने कहा– देना होगा गुजारा भत्ता

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

बिलासपुर: भरण-पोषण के एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल दूसरी शादी या ‘चूड़ी प्रथा’ से विवाह के आरोप के आधार पर पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा और पत्नी को भरण-पोषण राशि देने का निर्देश दिया।

मामला जशपुर जिले का है, जहां वर्ष 2009 में युवक की शादी उसी जिले की युवती से हुई थी। दंपति की तीन बेटियां हैं। आरोप है कि बेटियों के जन्म के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया और पति ने पत्नी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बाद में वह दूसरी महिला के साथ रहने लगा और अपनी वैध पत्नी को घर से निकाल दिया।

घर से बेदखल किए जाने के बाद महिला ने फैमिली कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत कर Hindu Marriage Act, 1955 के तहत भरण-पोषण की मांग की। सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।

फैमिली कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पत्नी ने अपनी मर्जी से घर छोड़ा और बाद में बिहार में एक अन्य व्यक्ति से ‘चूड़ी प्रथा’ के माध्यम से विवाह कर लिया, इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दूसरी शादी या चूड़ी विवाह के आरोपों के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित किया है, जिसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment