रायगड़ा: रायगड़ा जिले के काशीपुर ब्लॉक स्थित डोरागुडा गांव में जादू-टोना करने के संदेह में 65 वर्षीय व्यक्ति की नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान गोपाल डोरा के रूप में हुई है। ग्रामीणों को शक था कि वह जादू-टोना करता है और इसी वजह से उनके परिवारों को नुकसान पहुंच रहा है। इसी अंधविश्वास के चलते आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
रायगड़ा सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) गौरहरि साहू ने बताया कि शव मिलने के तीन दिनों के भीतर ही पूरे मामले का खुलासा कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में ईश्वर डोरा (ईशा), एनो डोरा, रामाराव डोरा, नाची डोरा, राजू डोरा और मोहनराव डोरा शामिल हैं। ईश्वर डोरा को पुरी से गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य पांच आरोपियों को डोरागुडा इलाके से पकड़ा गया।
पुलिस ने बताया कि मृतक की बेटी गंगम्मा डोरा ने 21 जनवरी को अपने पिता की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि उसके पिता गांव से करीब 300 मीटर दूर एक झोपड़ी में मवेशियों की देखभाल करते थे और पिछले 25 दिनों से घर नहीं लौटे थे।
गुरुवार को ग्रामीणों ने पास की एक नदी में गोपाल डोरा का शव देखा, जिसके हाथ-पैर बंधे हुए थे और कमर में एक पत्थर बंधा हुआ था। इसके बाद डोरागुडा IIC किरणबाला सामल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हत्या की बात कबूल कर ली।
पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई नीलगिरी की लकड़ी, प्लास्टिक की थैलियां और रस्सियां बरामद की हैं। पोस्टमार्टम के बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया।
यह घटना एक बार फिर राज्य के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में फैले अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि डोरागुडा क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक इकाइयों और CSR गतिविधियों के दावों के बावजूद, जमीनी स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम अब भी प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रहे हैं।
Author: Deepak Mittal










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