साय सरकार की सरेंडर नीति कामयाब, बस्तर में नक्सलवाद की जड़ सूखने लगी

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में साय सरकार की नक्सल विरोधी रणनीति सफल साबित हो रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को तुरंत नकद 10,000 रुपये, रहने-खाने की सुविधा, सुरक्षा और पुनर्वास पैकेज दिया जा रहा है। कई युवा अब अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं और शांतिपूर्ण जीवन बिताना चाहते हैं।

पिछले 50 दिनों में 553 नक्सलियों ने हथियार डालकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 69 इनामी नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर कुल 2.08 करोड़ रुपये का इनाम था। CPI (माओवादी) के कुख्यात कमांडर माड़वी हिडमा के न्यूट्रलाइज होने के बाद दक्षिण बस्तर के कई माओवादी नेता भी सरेंडर कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता को नक्सलवाद पर निर्णायक जीत बताते हुए कहा कि सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और सरेंडर नीति के कारण बस्तर में स्थायी शांति की राह खुली है। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य है।

सरकार ने बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर जिलों में ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत 145 गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास किया है। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

सीएम साय ने बीजापुर के अंदरूनी गांव गलगम का दौरा कर सुरक्षा बलों और ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पीएम आवास योजनांतर्गत स्वीकृति पत्र वितरित किए और स्थानीय विकास कार्यों को और तेज गति देने का भरोसा दिलाया।

सरेंडर नीति, सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के चलते बस्तर में नक्सलवाद धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

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Author: Deepak Mittal

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