जे के मिश्र l बिलासपुर अगर आपको भवन जमीन की रजिस्ट्री संबंधी कोई भी काम करवाना है तो परेशान होने की जरूरत नही है। बस गेट पर पहुंचिये और वहां खड़े दलालों से मिलकर अपना काम आसानी से करा लीजिये, इसके लिए आपको बस थोड़ा सुविधा शुल्क देना होगा। इसके बाद आपको चक्कर लगाने की भी जरूरत नही। आपका काम कुछ ही समय में हो जाएगा।
बिलासपुर के ह्रदय स्थल पर बने पंजीयक (रजिस्ट्री) कार्यालय की कहानी इन दिनों सुर्खियों में है। कार्यालय के गेट पर पहुंचते ही गेट के बाहर खड़े दलाल घेर लेंगे। अगर किसी तरह से वह आपको नही पकड़ सके तो कार्यालय के अंदर बैठे दलाल आपको फंसाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
ऐसे में परेशान क्रेता / विक्रेता दोनो दलालों के चुंगल में फंसकर सुविधा शुल्क देने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सुविधा शुल्क न देने पर उन्हें पंजीयक कार्यालय के चक्कर तो काटने ही पड़ेंगे साथ ही उनका समय भी व्यर्थ जायेगा। इस बात को हम नहीं बल्कि कार्यालय में मौजूद दलालों की यह तस्वीर बोल रही है। पंजीयक कार्यालय व आसपास का वातावरण बयां करता नजर आया।
आप कभी भी देखो तो पंजीयक कार्यालय के बाहर से लेकर अंदर तक दलालों का जमावड़ा लगा था, आश्चर्य की बात तो तब नजर आई, जब वहां पर कुछ दलाल ऐसे बैठे थे, जैसे स्वयं पंजीयक कार्यालय में कोई अधिकारी कर्मचारी हैं। ऐसे में तहसील भर से खरीदी बिक्री का कार्य करवाने के लिए आने वाले उपभोक्ता यह नहीं पहचान पाते हैं कि कौन विभाग का कर्मचारी है और कौन दलाल। ऐसे में कुछ लोग तो दलालों को ही पंजीयक कार्यालय स्टाफ समझते हैं। गौर करने की बात यह है कि भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए शासन द्वारा पंजीयक संबंधी अधिकतर कार्य ऑनलाइन कर दिए गए हैं। फिर भी जिससे लोगों से किसी भी प्रकार की अवैध कमाई न की जा सके। लेकिन जब हमारी टीम के द्वारा पड़ताल किया गया तो हालात कुछ और दिखा। वैसे तो ऑनलाइन काम को लेकर फीस जमा कराने तक के सभी कार्य ऑनलाइन हो रहे हैं। लेकिन उसके बावजूद भी लोगों का काम बिना दलालों के नहीं हो पा रहा है।
बिना दलाल के अगर कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति ऑनलाइन फार्म भरकर विभाग में अपना कार्य करवाने जाता भी है तो उसे विभिन्न प्रकार की कमियां बताकर वापस कर देते हैं। किसी तरह से फार्म भरकर अधिकारी के टेबल तक पहुंचा भी तो उसमें कई कमियां निकाल कर आपकी रजिस्ट्री रोक देते हैं। ऐसे में परेशान होकर व्यक्ति को दलाल की तलाश करना ही पड़ता है। इसी कारण से लोग यहां दलालों को सुविधा शुल्क देते हैं। कार्यालय में जैसे ही कोई व्यक्ति कार्य लेकर आता है उसे पहले से ही मौजूद दलाल गेट पर ही पकड़ लेते है।
पंजीयक कार्यालय में आए एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मुझे अपनी जमीन को बेचना था। मैं पहले यहां आया तो मुझे कई प्रकार के दस्तावेज देने की बात कही। मैं आवेदन भी ऑनलाइन कराने के लिए गया। लेकिन कई दस्तावेजों की मांग आई कारण मुझे मजबूरन दलाल से ही बात करनी पड़ी, क्योंकि बार बार आने से काम धंधे का नुकसान होता है।
छत्तीसगढ़ शासन में अब एक बेहद ईमानदार जन जन के नेता का शासन है जो साय साय निर्णय लेने में कुछ ही समय जन सामान्य में विख्यात हो गये आशा है कि उनके संज्ञान में इस विभाग की कार्य पद्धति की आयेगी और ठोस कार्यवाही होगी
वैसे ये मलाईदार विभाग है शायद ही इसके विरुद्ध कोई कार्यवाही करेगा
*यह सत्य है इस विभाग पर बिना दलाल के कोई भी किसी भी तरह का कार्य नहीं करा सकता विभाग के कर्मचारी /अधिकारी पूर्ण रूपेण दलालों पर आश्रित है विभाग के सभी कर्मचारियों की संपत्ति की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो से करानी चाहिये*

Author: Deepak Mittal
