सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में भारी कटौती की है। पेट्रोल और डीजल दोनों पर 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इसके बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
यह फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच लिया गया है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण गहरा गया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अवरुद्ध किए जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर किए एक पोस्ट में कहा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर/बैरल से बढ़कर 122 डॉलर/बैरल हो गई हैं।
इसका असर सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है। दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में0%-50%, उत्तरी अमेरिका में %, यूरोप में 20% और अफ्रीका में 50% की बढ़ोतरी हुई है।
International crude prices have gone through the roof in the last 1 month from around 70 dollars/barrel to around 122 dollars/barrel. Consequently, petrol and diesel prices for consumers have gone up all over the world. Prices have increased by around 30%-50% in South East Asian…
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) March 27, 2026
पुरी ने कहा कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे- पहला, अन्य देशों की तरह भारतीय नागरिकों से कीमतें बढ़ाना। दूसरा, अपनी वित्तीय स्थिति पर असर डालकर भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की चार साल से चली नीति के अनुरूप दूसरा विकल्प चुना और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए खुद वित्तीय झटका सहा। सरकार ने अपने कर राजस्व में बड़ा त्याग किया ताकि तेल कंपनियों के भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग ₹24/लीटर और डीजल पर ₹30/लीटर) को कम किया जा सके।
Author: Deepak Mittal










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