रतलाम : शोपीस बनी सिग्नल लाइटें, ट्रैफिक जाम से बेहाल शहर

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

रिपोर्ट : इमरान खान, रतलाम

रतलाम शहर इन दिनों ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि चौराहों पर लगी करोड़ों की सिग्नल लाइटें शोपीस बनकर रह गई हैं। इससे पहले भी सिग्नल लाइट्स बंद पड़ी-पड़ी भंगार हो गई थीं, और अब दोबारा लगाई गई लाइटें भी शुरू नहीं हो पाईं।


लगातार बढ़ते जाम की शिकायतों पर कलेक्टर राजेश बाथम और एसपी अमित कुमार ने मंगलवार को शहर का निरीक्षण किया। कोर्ट चौराहे से शुरुआत हुई, जहां नाश्ता प्वाइंट और पार्किंग की अव्यवस्था से रोजाना जाम लगता है। लोकेंद्र टॉकीज, दो बत्ती, शाहिद चौक, घांस बाजार और अन्य प्रमुख चौराहों पर भी यही स्थिति है।


पिछले तीन साल में शहर में हर साल 25 से 30 हजार नए टू-व्हीलर बिके हैं। लेकिन बढ़ती गाड़ियों के मुकाबले शहर की सड़कें, पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट जस के तस हैं। अतिक्रमण ने भी फोरलेन सड़कों को टू-लेन में बदल दिया है।


नगर निगम के नियमों के अनुसार हर दुकान, स्कूल, होटल और मैरिज गार्डन में पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य है। तभी नक्शा पास और परमिशन दी जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश संस्थानों में पार्किंग या तो है ही नहीं या फिर नाम मात्र की है। जगह की लालच में व्यापारी और संस्थान पार्किंग नहीं बनाते और इसका खामियाजा आम जनता भुगतती है।


जाम के समय ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति आम बात है। यातायात पुलिस केवल चालान काटने में सक्रिय रहती है, लेकिन भीड़ के समय गायब हो जाती है। कई बार मीडिया और नागरिकों की शिकायतों के बाद भी अधिकारियों की उदासीनता बनी रहती है।


महापौर, कमिश्नर और कलेक्टर बदलते रहे, लेकिन शहर की ट्रैफिक समस्या जस की तस है। सिग्नल लाइट्स चालू नहीं हो पा रही हैं और जिम्मेदार कार्रवाई से बचते रहे हैं। अब जरूरत है कि मास्टर प्लान बनाकर धरातल पर अमल किया जाए, अतिक्रमण हटे, पार्किंग नियमों का पालन हो और ट्रैफिक व्यवस्था को सही मायने में लागू किया जाए।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment