शैलेश शर्मा : घरघोड़ा :- जिले के घरघोड़ा विकासखंड में भाजपा की अजीबोगरीब चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया वहीं राजनीतिक गलियारों से यह खबर निकल कर सामने आ रही है।
कि घरघोड़ा मंडल जो जब जब जबसांसद राधेश्याम राठिया का गृह क्षेत्र है वहां पर प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर किसी भी तरह का कोई कार्यक्रम नहीं हुआ, यह स्थिति पार्टी की विचारधारा और अनुशासन पर गहरा सवालिया निशान लगाती है।
प्रदेश और जिला स्तर के तमाम बड़े नेता होने के बावजूद, घरघोड़ा मंडल में मोदी के जन्मदिन पर कोई कार्यक्रम न होना, पार्टी की आंतरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या स्थानीय नेता इतने आत्ममुग्ध हो चुके हैं कि उन्हें अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की परवाह नहीं रही? या फिर यह एक सोची-समझी राजनीति है, जो पार्टी के भीतर की विभाजन रेखाओं को दर्शाती है?

राधेश्याम राठिया, जो खुद मोदी सरकार के कार्यों का हिस्सा रहे हैं, अपने ही क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण दिन पर कोई आयोजन न करवा पाए, यह उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़ा करता है। क्या राठिया अब अपनी ही पार्टी के भीतर अलग-थलग पड़ चुके हैं, या फिर यह उनका जानबूझकर लिया गया फैसला था, जो भाजपा के भीतर गहरी दरार का संकेत देता है?
यह स्थिति भाजपा के अनुशासन और पार्टी के प्रति निष्ठा की पोल खोल रही है। मोदी जैसे करिश्माई नेता, जिनके नेतृत्व में भाजपा आज अपने चरम पर है, के जन्मदिन पर इस तरह का अनदेखापन यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर कुछ गंभीर रूप से गलत हो रहा है।
जब घरघोड़ा मंडल में इतने बड़े नेता मौजूद हैं, तो क्या यह संभव है कि यह केवल एक “लापरवाही” है, या फिर यह पार्टी की नीतियों और नेतृत्व के प्रति असहमति का संकेत है?
बहर हाल यह स्थिति भाजपा के अनुशासन और एकजुट के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ।।
Author: Deepak Mittal










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