नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में स्थित छारी-ढांड को प्रतिष्ठित रामसर साइट्स की सूची में शामिल किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे जैव विविधता संरक्षण और वेटलैंड्स की रक्षा के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “खुशी है कि एटा (उत्तर प्रदेश) में पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में छारी-ढांड रामसर साइट्स बन गए हैं। वहां की स्थानीय आबादी के साथ-साथ वेटलैंड संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को बधाई। ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। ये वेटलैंड अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास बने रहें।”
प्रधानमंत्री का यह बयान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के पोस्ट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने इन दोनों वेटलैंड्स को रामसर मान्यता मिलने की घोषणा की थी। भूपेंद्र यादव ने लिखा, “विश्व वेटलैंड्स दिवस नजदीक है और इस अवसर पर मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत के बढ़ते रामसर नेटवर्क में दो नए नाम जुड़े हैं—उत्तर प्रदेश के एटा में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में छारी-ढांड।”
घोषणा के अनुसार, ये दोनों वेटलैंड सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं। इसके साथ ही ये क्षेत्र चिंकारा, भेड़िया, काराकल, रेगिस्तानी बिल्ली और रेगिस्तानी लोमड़ी जैसे स्तनधारियों तथा कई लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों का भी घर हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर वेटलैंड नेटवर्क में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां देश में केवल 26 रामसर साइट्स थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 98 हो गई है, जो 276 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है। यह विस्तार पर्यावरण संरक्षण, वेटलैंड संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
अधिकारियों के अनुसार, पटना पक्षी अभयारण्य और छारी-ढांड को न केवल उनके पारिस्थितिक महत्व के लिए, बल्कि स्थानीय आजीविका को बनाए रखने और इकोसिस्टम सेवाओं को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व वेटलैंड्स दिवस से पहले इन साइट्स को रामसर सूची में शामिल किया जाना जलवायु परिवर्तन से निपटने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भारत के सक्रिय प्रयासों का स्पष्ट संकेत है।
Author: Deepak Mittal










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