नोएडा: एनसीआर क्षेत्र में चंद्रग्रहण को लेकर धार्मिक आस्था और परंपराओं का व्यापक असर देखने को मिला। चंद्रग्रहण से ठीक नौ घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ होते ही क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
परंपरा के अनुसार सूतक काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान स्थगित कर दिए जाते हैं।
सुबह 6:20 बजे बंद हुए कपाट
मंदिर प्रबंधन समितियों के अनुसार सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर विधिवत मंत्रोच्चार के साथ कपाट बंद किए गए। इस दौरान मंदिरों में मौजूद श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे सूतक काल की धार्मिक मान्यताओं का पालन करें और घरों में ही भजन-कीर्तन व पूजा करें।
कई स्थानों पर मंगलवार सुबह की आरती निर्धारित समय से पहले संपन्न कर ली गई, जिसके बाद मंदिर परिसर को पूरी तरह खाली करा दिया गया।
मूर्तियां ढकी गईं, पूजा सामग्री सुरक्षित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी कारण देवी-देवताओं की मूर्तियों को विशेष रूप से ढक दिया गया और पूजा सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रख दिया गया। सूतक काल में मंदिरों में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि नहीं की जाती है।
ग्रहण समाप्ति के बाद होगा शुद्धिकरण
मंदिर प्रबंधन के मुताबिक चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 7 बजे के पश्चात कपाट दोबारा खोले जाएंगे। इसके बाद मंदिर परिसर की विधिवत साफ-सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा।
शुद्धिकरण प्रक्रिया के तहत गंगाजल का छिड़काव, धूप-दीप प्रज्वलन और विशेष मंत्रोच्चार किया जाएगा। इसके पश्चात विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालु भाग ले सकेंगे।
प्रशासन और मंदिर समितियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़ से बचते हुए निर्धारित समय के बाद ही मंदिर पहुंचे और परंपराओं का सम्मान करें। एनसीआर में चंद्रग्रहण को लेकर आस्था और उत्सुकता का माहौल बना हुआ है।
Author: Deepak Mittal










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