नई दिल्ली: देशभर में जिम और फिटनेस सेंटर्स में ट्रेनर्स द्वारा महिलाओं, बालिकाओं और किशोरियों को निशाना बनाकर किए जा रहे कथित यौन शोषण के मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ी चिंता जताई है। इस गंभीर मुद्दे पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे सामाजिक, नैतिक और कानूनी दृष्टि से बेहद गंभीर समस्या बताया है।
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि जिम और फिटनेस क्लब्स में केवल यौन शोषण ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अमानक फूड सप्लीमेंट्स का उपयोग और अनियंत्रित शारीरिक गतिविधियां मानव जीवन के लिए जोखिम बनती जा रही हैं। इसी को देखते हुए आयोग ने सभी राज्य सरकारों, खेल मंत्रालय और खेल प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है।
इन नोटिसों के माध्यम से जिम और फिटनेस सेंटर्स की स्थापना और संचालन से जुड़ी मौजूदा नियमावली और गाइडलाइंस की जानकारी मांगी गई है, ताकि इस क्षेत्र में व्याप्त अनैतिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,
“जिम और फिटनेस क्लब्स में ट्रेनर्स द्वारा महिलाओं/बालिकाओं/किशोरियों को लक्षित कर किए जा रहे यौन शोषण के अनेक मामले देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अमानक फूड सप्लीमेंट और अनियंत्रित शारीरिक गतिविधियां मानव जीवन के लिए खतरा हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सभी राज्य सरकारों और संबंधित विभागों से नियमों की जानकारी लेकर इस क्षेत्र में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी NHRC ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में जिम और फिटनेस सेंटर की आड़ में युवतियों के शोषण और कथित जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों पर स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मिर्जापुर में एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो जिम और फिटनेस सेंटर्स के जरिए युवतियों को निशाना बनाता था। अब NHRC की सख्ती के बाद इस पूरे मामले पर देशभर में निगरानी और कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
Author: Deepak Mittal










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