दिल्ली: ईरान में महंगाई, बेरोज़गारी और कट्टरपंथ के खिलाफ चल रहा Gen-Z आंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय तनाव का बड़ा कारण बन गया है। इस आंदोलन के दौरान अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 496 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। वहीं 10 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। हालात को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका गहराती जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार की कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सैन्य प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। ट्रंप का कहना है कि ईरान सरकार ने अपनी सभी सीमाएं पार कर दी हैं और प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है। दूसरी ओर, ईरान सरकार इस आंदोलन के पीछे अमेरिका और इजरायल की साजिश बता रही है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी करार देते हुए दावा किया है कि उनके पास ऐसे वीडियो सबूत हैं, जिनमें हथियारबंद लोगों को ईरान में अराजकता फैलाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों देश ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि वे बातचीत का रास्ता अपनाएं, अन्यथा सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
इस बीच ईरानी संसद में अमेरिका के विरोध में “डेथ टू अमेरिका” के नारे लगाए गए, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के संकेत मिले हैं। मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों की मौत और बड़ी संख्या में हिरासत को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर संभावित हमलों से जुड़े कई रणनीतिक विकल्प पेश किए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका ईरान के लोगों के साथ खड़ा है और यह आंदोलन आज़ादी की दिशा में पहला कदम है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका सक्रिय कदम उठा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले साल 2022 में हिजाब विवाद के दौरान महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों में भी करीब 500 लोगों की जान गई थी। मौजूदा Gen-Z आंदोलन उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जो अब वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान पर टिकी है। किसी भी छोटी चिंगारी से अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव हो सकता है, जिसका असर क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8141821
Total views : 8154230