कोरबा, 21 अगस्त 2025
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की युक्तियुक्तकरण नीति ने कोरबा जिले के अंतिम छोर पर बसे गाँव माँझीपारा के विद्यार्थियों को एक नई दिशा दी है। वर्षों से शिक्षक की कमी से जूझ रहे इस प्राथमिक शाला को आखिरकार एक नया ‘खेवइया’ मिल गया है—एक शिक्षिका, जो न केवल शिक्षा दे रही हैं, बल्कि बच्चों के सपनों को नई उड़ान भी।
पाली विकासखंड की ग्राम पंचायत डोंगानाला के अंतर्गत माँझीपारा गाँव में मछुआरों और मजदूरी करने वाले मांझी परिवारों की बसाहट है। इन परिवारों के बच्चों के लिए शासन ने 2004 में यहाँ प्राथमिक शाला की स्थापना की थी, लेकिन पिछले दो दशकों से यह विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहा था। ऐसे में युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत शिक्षिका राजश्री लहरे की नियुक्ति इस विद्यालय के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
विद्यालय के प्रधानपाठक मणि दास मानिकपुरी ने बताया कि वर्तमान में 50 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। नियमित शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। नई शिक्षिका के आने से अब कक्षाएं नियमित और प्रभावी रूप से संचालित हो रही हैं।
नई उम्मीद, नई ऊर्जा
राजश्री लहरे जैसे ही कक्षा में प्रवेश करती हैं, बच्चों के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है। कक्षा दूसरी की सिमरन, बृज कुमारी, और कक्षा पांचवीं की सती कुमारी एवं प्रियांशी जैसी छात्राएं बड़े उत्साह से पढ़ाई में जुटी हैं। “नई मैडम बहुत अच्छी लगती हैं, हमें हिंदी और गणित पढ़ाती हैं,” बच्चों ने बताया।
शिक्षिका राजश्री का कहना है कि उन्होंने बच्चों से घुलने-मिलने का प्रयास किया है ताकि वे निसंकोच होकर सवाल पूछ सकें और पढ़ाई में मन लगा सकें। विद्यालय में उनका आना मानो उस नाव में पतवार का लग जाना है, जो अब मंझधार से निकलकर सीधे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
माँझीपारा की पाठशाला को नई दिशा
यह कहानी केवल एक नियुक्ति की नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति शासन की प्रतिबद्धता की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू युक्तियुक्तकरण की नीति के परिणामस्वरूप अब ऐसे दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों में भी शिक्षा का प्रकाश पहुँच रहा है।
माँझीपारा के पालकों के लिए भी यह राहत की बात है। अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता थोड़ी कम हो गई है। उनके लिए यह विद्यालय केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि एक आशा की किरण है।

Author: Deepak Mittal
