खुंटाघाट बांध लबालब… वेस्ट वियर से शुरू हुआ छलकना… नजारा देखने बड़ी संख्या में पहुँचते हैं पर्यटक

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

रत्नपुर: अंचल के सबसे प्रसिद्ध बांध और पर्यटक स्थल खुडियाघाट में रविवार को वेस्ट वियर से पानी गिरना आरंभ हो गया। ऐसा बरसों बाद हुआ है जब जुलाई माह में ही बांध छलकने लगा। करीब 1.15 लाख एकड़ में इस बांध से सिंचाई होती है।

पिछले साल अच्छी बारिश के कारण बांध में पर्याप्त पानी आया और इस वर्ष कुछ दिनों पहले तक पानी की कमी रही किंतु कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण बांगो नदी में पर्याप्त पानी हो गया। इसी कारण रविवार को बांध पूरी तरह भर गया और वेस्ट वियर से अतिरिक्त पानी गिरना आरंभ हो गया। बांध को सुरक्षित रखने के लिए यह व्यवस्था की जाती है, जिससे बांध में अतिरिक्त पानी जमा होने के बाद यह एक चार निकासी से बह जाता है।

विशालकाय बांध में अतिरिक्त जल जब ढलकर नदी रूपी निकासी में गिरता है तो यह विहंगम दृश्य किसी झरने की तरह दिखाई पड़ता है, जिस कारण यह नजारा पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होता है। प्रति वर्ष पर्यटकों की बांध के ओवरफ्लो होने की प्रतीक्षा रहती है। इस वेस्ट वियर को देखने दूर-दूर से लोग खुडियाघाट पहुंचते हैं।

अमूमन ऐसा नजारा अगस्त के अंतिम दिनों में या फिर सितंबर माह में नजर आता है। लेकिन इस साल जुलाई के बाद अच्छी बारिश के कारण जुलाई महीने में ही खुडियाघाट बांध पूरी तरह भर गया, यह पूरे अंचल के लिए अच्छी खबर है। उम्मीद थी कि एक-दो दिनों में यह पूरी तरह भर जाएगा लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण रविवार को ही बांध पूरा भर गया। यह खबर आसपास फैलते ही लोग इस नजारे को देखने पहुंच रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल खुडियाघाट बांध यानी संजय गांधी जलाशय पूरी तरह भर जाने से आगामी काफी दिनों तक यह वेस्ट वियर चालू रहेगा, जिससे यहां पर्यटकों की आने से आमद बढ़ेगी। खुडियाघाट जलाशय को संजय गांधी (खारंग) जलाशय भी कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर-अंकोतखार हाईवे पर स्थित रतनपुर से 12 किलोमीटर दूरी में खारंग नदी पर इस बांध का निर्माण किया गया है। इस बांध का निर्माण स्वतंत्रता के पूर्व 1920-30 के मध्य अंग्रेज शासन काल में किया गया था। इस बांध की सहायता से पूरे क्षेत्र में सिंचाई की प्रक्रिया की जाती है। इसके अलावा बिलासपुर शहर में पानी की आपूर्ति भी इसी बांध से वर्तमान में हो रही है।

बांध का नाम खुडियाघाट क्यों…
इस बांध के निर्माण के समय उसके डूबान क्षेत्र के पेड़ों को काटा नहीं गया था, जिस वजह से इस क्षेत्र के डूबने के बाद लकड़ी के ठूंठ यहां आज भी मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ी में लकड़ी के इन ठूंठ को ‘खुंटा’ कहा जाता है, जिस वजह से कालांतर में इस जगह को खुडियाघाट के नाम से जाना जाता है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment