ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और दिल दहला देने वाली घटना में 50 वर्षीय हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की इलाज के दौरान मौत हो गई। भीड़ द्वारा बेरहमी से पीटने और आग के हवाले किए जाने के बाद वह पिछले तीन दिनों से मौत से जूझ रहे थे, लेकिन आखिरकार शनिवार (3 जनवरी 2026) को उन्होंने दम तोड़ दिया।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, ढाका स्थित नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डॉ. शाओन बिन रहमान ने खोकन दास की मौत की पुष्टि की है। घटना के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दवाई की दुकान बंद कर लौट रहे थे घर, रास्ते में बरसी हैवानियत
बताया जा रहा है कि खोकन चंद्र दास दवाई और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार करते थे। 31 दिसंबर 2025 की रात वह अपनी दुकान बंद कर ऑटो से घर लौट रहे थे। इसी दौरान दामुद्या-शरियतपुर रोड पर कुछ हमलावरों ने उनका रास्ता रोका, धारदार हथियारों से हमला कर उन्हें बुरी तरह लहूलुहान कर दिया और फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया।
जान बचाने तालाब में कूदे, लेकिन नहीं बच सकी जिंदगी
बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, आग की लपटों से घिरे खोकन दास जान बचाने के लिए पास के एक तालाब में कूद पड़े। उनकी चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। गंभीर रूप से झुलसे खोकन दास को पहले शरियतपुर सदर अस्पताल और बाद में ढाका के नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया, जहां तीन दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद उनकी मौत हो गई।
लगातार बढ़ रही हिंसा, अल्पसंख्यकों में डर का माहौल
इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही हत्याओं, हमलों और उत्पीड़न से हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश का माहौल है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, लेकिन पीड़ित परिवार और समुदाय को अब भी न्याय का इंतजार है।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8142241
Total views : 8154898